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India Bangladesh Corridor: इस मुस्लिम देश से होकर गुजरेगा भारत का एक्सप्रेस-वे, 600 KM का सफर मात्र 120 KM में होगा पूरा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 2, 2024, 03:45 PM IST

India Bangladesh Corridor(तीन बीघा कॉरिडोर): भारत- बांग्लादेश का यह कॉरीडोर कोई नया नहीं है। 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच शुरू हुई जंग तक यह कॉरीडोर आम नागरिकों के लिए खुला था। भारत के इस कदम से पाकिस्तान को मिर्ची लगनी तय मानी जा रही है। दरअसल, यह कॉरीडोर भारत के एक और मुस्लिम देश के साथ बेहतर संबंध का भी गवाह बनेगा।

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भातर-बांग्लादेश कॉरीडोर

Photo : iStock

India Bangladesh Corridor in Hindi: साल 2014 के बाद से देश में सड़कों का जाल काफी तेजी से फैला है। देश के कई बड़े शहरों को एक्सप्रेस-वे से जोड़ा गया है। आने वाले कुछ सालों में रोड नेटवर्क और भी ज्यादा समृद्ध होने वाला है, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसी क्रम में एक और बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। अब भारत देश में ही नहीं बल्कि विदेश (मुस्लिम देश) में भी एक्सप्रेस-वे बनाने जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से भारत के दो बड़े शहरों की दूरी करीब 450 किलोमीटर कम हो जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में रोड नेटवर्क बनाने की तैयारी में जुट गया है। यह एक्सप्रेस वे बांग्लादेश के बीचों-बीच से होकर गुजरेगा, जिससे पूर्वोत्तर के शहरों को सीधे पश्चिम बंगाल से जोड़ा जा सकेगा। अभी यह दूरी तय करने में करीब 600 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। एक्सप्रेस-वे तैयार होने के बाद यह दूरी 120 किलोमीटर रह जाएगी।

पहले तय करना पड़ता था 588 किलोमीटर का सफर

बांग्लादेश से गुजरने वाला भारत का यह कॉरीडोर पश्चिम बंगाल के बालुरघाट को मेघालय के तुरा से जोड़ेगा। पहले यह दूरी तय करने में लोगों को 588 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी। हालांकि, अब यह दूरी मात्र 120 किलोमीटर की रह जाएगी। भारत सरकार, बांग्लादेश में सड़क के साथ रेल यातायात पर भी बातचीत कर रही है।

1965 तक खुला था कॉरीडोर

बता दें, भारत- बांग्लादेश का यह कॉरीडोर कोई नया नहीं है। 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच शुरू हुई जंग तक यह कॉरीडोर आम नागरिकों के लिए खुला था। हालांकि, 1971 की जंग के बाद इसे भारतीय नागरियों के लिए बंद कर दिया गया। अब भारत सरकार देश के दो प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए फिर से इस कॉरीडोर को शुरू करने की तैयारी में है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान को मिर्ची लगनी तय मानी जा रही है। दरअसल, यह कॉरीडोर भारत के एक और मुस्लिम देश के साथ बेहतर संबंध का भी गवाह बनेगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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