Inter Religious Marriage News: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने केवल शादी के उद्देश्य से या बलात्कार के आरोपों का सामना कर रहे पुरुषों द्वारा कानून से बचने के लिए किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की और ऐसे मामलों में पालन किए जाने योग्य कई दिशानिर्देश जारी किए, उच्च न्यायालय ने कहा कि दूसरे धर्म को अपनाने (Religion Change) के इच्छुक व्यक्ति की सहमति होनी चाहिए और इस तरह के जीवन का विकल्प चुनने में इसके निहितार्थों से भी उसे पूरी तरह परिचित होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि धर्म और उससे जुड़े प्रभावों की विस्तृत समझ प्रदान करके व्यक्ति को धर्मांतरण के बाद उसकी कानूनी स्थिति में संभावित बदलावों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने कहा, 'यह उस स्थिति में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब व्यक्ति के अपने धर्म में वापस लौटने पर कानूनी, वैवाहिक, उत्तराधिकार और संरक्षण से संबंधित परिणाम सामने आ सकते हैं। यह अदालत केवल ऐसी स्थितियों से चिंतित है। ये स्थितियां किसी भी धर्म में परिवर्तन से उत्पन्न हो सकती हैं।
तथ्यों और जांच से 'प्रेम, झूठ, कानून और मुकदमेबाजी की कहानी' का पता चलता है
बलात्कार और आपराधिक धमकी के अपराध के लिए एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया। व्यक्ति ने इस आधार पर प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध किया था कि उसने और कथित पीड़िता ने समझौता कर लिया है और एक-दूसरे से शादी कर ली है।अदालत ने कहा कि तथ्यों और जांच से 'प्रेम, झूठ, कानून और मुकदमेबाजी की कहानी' का पता चलता है। यह भी पता चला कि पुरुष और महिला पहले से ही विवाहित थे, फिर भी पीड़ित और आरोपी ने एक-दूसरे से विवाह किया।
व्यक्ति एक मुस्लिम है और वह मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार दूसरी बार शादी कर सकता था लेकिन वह इस महिला से शादी नहीं कर सकता था क्योंकि वह हिंदू थी और उसका पति जीवित था तथा उसका तलाक नहीं हुआ था। अदालत ने कहा कि शादी का समय भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे प्राथमिकी रद्द करने की याचिका का आधार बनाया गया था और प्राथमिकी दर्ज होने के दस दिन बाद 2022 में महिला के धर्म परिवर्तन की उसी तारीख को शादी हुई।
