Kargil Airstrip: भारतीय वायुसेना (IAF) का सी-17 ग्लोबमास्टर ने बुधवार को पहली बार कारगिल की हवाई पट्टी को नमन किया। सी-17 ग्लोबमास्टर की सफल परीक्षण लैंडिंग हुई। इस परीक्षण को वायुसेना के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे कारगिल में वायुसेना की परिचालन क्षमता और भार वहन करने की क्षमता में काफी वृद्धि होगी।
परिवहन क्षमता में होगा इजाफा
इससे पहले कारगिल की हवाई पट्टी पर महज एएन-32 और सी-130 विमान संचालित होते थे। सर्दियों में 25 से 35 टन तक वजन ले जाने की सी-17 ग्लोबमास्टर की क्षमता वायुसेना की परिवहन क्षमता को बढ़ाएगी जिसकी बदौलत वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चौकियों तक सैनिकों और सैन्य आपूर्ति को ले जाना काफी आसान होगा।
कब संचालित होंगी उड़ानें?
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सी-17 ग्लोबमास्टर की उड़ानें शुरुआत में दिन में ही संचालित होंगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि परीक्षण लैंडिंग दिन के उजाले में ही संपन्न हुई है। पिछले साल वायुसेना ने पहली बार सी-130जे विमान को रात में उतारा था। सी-17 ग्लोबमास्टर की सफल लैंडिंग भारत के लिए गेमचेंजर साबित होगी।
चुनौतीपूर्ण होती है लैंडिंग
कारगिल की हवाई पट्टी लगभग 9700 फीट की ऊंचाई पर है और पहाड़ियों से घिरी हुई है, जहां पर विमान की लैंडिंग चुनौतीपूर्ण होती है। सी-17 ग्लोबमास्टर आमतौर पर 60-70 टन भार को वहन कर सकता है, लेकिन कारगिल के चुनौतीपूर्ण मौसम को देखते हुए इसकी क्षमता कम हो जाती है। इसी वजह से ग्लोबमास्टर की सर्दियों में 25 से 35 टन भार क्षमता के साथ लैंडिंग हो सकती है।
