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कितनी 'चमत्कारिक' है नाथूला से कैलाश मानसरोवर की यात्रा, तीर्थयात्रियों ने बयां किया अपना अनुभव

नाथूला मार्ग से हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा की के लेकर अधिकारियों का दावा है कि यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में तैयारियों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है। इसे लेकर यात्रा पर गए लोगों ने अपने अनुभव बयां किए।

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नाथूला मार्ग से हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा की सुविधाओं की सराहना (PHOTO-istock)

गंगटोक: नाथूला मार्ग से हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा की तीर्थयात्री और अधिकारी काफी तारीफ कर रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में तैयारियों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई है।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राजेंद्र छेत्री का कहना है कि तीर्थयात्रियों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया इस बात का सबूत है कि यात्रा का आयोजन बेहद शानदार है। चौथा जत्था अपनी पवित्र यात्रा पूरी कर ल्हासा के लिए रवाना हो चुका है। वहीं, पांचवां जत्था इस समय शेरथांग में तिब्बत में प्रवेश की तैयारी कर रहा है।

तीर्थयात्री एसटीडीसी की सुविधाओं से बहुत खुश

उन्होंने कहा कि तीर्थयात्री एसटीडीसी की सुविधाओं से बहुत खुश हैं। एक समय में तिब्बती क्षेत्र में दो जत्थे रहते हैं। एक प्रवेश करता है और दूसरा वापस लौटता है। पहले जत्थे में 36 तीर्थयात्री थे, जबकि बाकी में 45-48 यात्री शामिल हैं। प्रत्येक जत्थे के साथ विदेश मंत्रालय के दो संपर्क अधिकारी भी होते हैं। अंतिम जत्था 7 अगस्त को रवाना होगा, 12 अगस्त को तिब्बत में प्रवेश करेगा और 23 अगस्त तक भारत लौट आएगा। सभी तीर्थयात्रियों के 24 अगस्त तक स्वदेश लौटने की उम्मीद है। 2019 की पिछली यात्रा की तुलना में इस बार व्यवस्थाओं में काफी सुधार हुआ है।

तीर्थयात्रियों ने सुविधाओं को सराहा

उन्होंने बताया कि स्वच्छता और आवास की सुविधाओं में विशेष प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि इस साल चीनी अधिकारी भी बहुत सहयोग कर रहे हैं और उन्होंने बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया है। एक महिला तीर्थयात्री ने कहा कि यह यात्रा ईश्वर की कृपा से ही संभव हुई। सब कुछ इतनी अच्छी तरह से प्रबंधित था कि हमें कोई परेशानी नहीं हुई। योगी जी ने स्वयं हमारा स्वागत किया और उपहार दिए, जिससे यात्रा की शुरुआत बहुत खास रही।

"यात्रा का अनुभव दिव्य रहा"

उन्होंने कैलाश पर्वत के दर्शन को गहरा आध्यात्मिक अनुभव बताते हुए कहा कि उस पल को याद करके आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मैं भारतीय और चीनी अधिकारियों के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाले सभी लोगों की आभारी हूं। यह यात्रा न केवल सुगम थी, बल्कि वास्तव में दिव्य थी। वहीं, पुणे के तीर्थयात्री रवि वर्मा ने भी इस अनुभव को शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि लंबी चढ़ाई और ऊंचाई के बावजूद मुझे कोई दर्द नहीं हुआ। यह अपने आप में चमत्कार जैसा था।

इसके अलावा, उन्होंने यमद्वार, डेराफुक और डोलमा दर्रे की यात्रा का जिक्र किया, जो सबसे कठिन हिस्सों में से हैं। कम ऑक्सीजन और खड़ी चढ़ाई के बावजूद, डोलमा दर्रा सुरक्षित और सुगम लगा। गौरीकुंड से जल लेना मेरे लिए खास पल था। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने 1997 में 500 किलोमीटर पैदल चलकर यह यात्रा की थी, जिसने उन्हें प्रेरित किया। मैंने भले ही 40 किलोमीटर की यात्रा की, लेकिन यह अनुभव उतना ही खास था। मेरी सारी सफलता कैलाश पर्वत के आशीर्वाद से है। भोपाल के तीर्थयात्री देवेंद्र तिवारी ने यात्रा को सुचारू और संतोषजनक बताते हुए साथी तीर्थयात्रियों के अनुशासन की तारीफ की और भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, आईटीबीपी और एसटीडीसी को उनके समन्वय के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “बारिश या बादल भी हमारी राह में रुकावट नहीं बने। हमने शांतिपूर्वक दर्शन और पूजा पूरी की। मैं सचमुच धन्य महसूस करता हूं।”

(आईएएनएस इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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