Times Now Summit 2025: टाइम्स नाउ समिट 2025 के दूसरे दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर हिंसा, आतंकवाद-नक्सलवाद, अवैध प्रवासियों, संसद सत्र सहित इत्यादि मुद्दों पर अपनी बात रखी। टाइम्स नाउ और टाइम्स नाउ नवभारत की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक के बाद एक मुद्दों पर कई सवाल पूछे जिसका उन्होंने बड़ी बेबाकी के साथ जवाब दिया। इस बीच, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत का फॉर्मूला भी बताया।
उन्होंने कहा कि सुबह 6 बजे से रात को एक बजे तक अपने लिए जीने की जगह, देश के लिए जीना सीखिए, जो भाजपा के नेता करते हैं। अगर-मगर सुबह 6 बजे से लेकर जब नींद न लगे अपने लिए जिएंगे तो ईवीएम हरा देगा।
'संसद में बोलने के होते हैं नियम'
राहुल गांधी के माइक बंद करने के आरोप पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को शायद मालूम नहीं होगा, पार्लियामेंट में बोलने के रूल होते हैं। बजट पर चर्चा हुई तो उन्हें 42 प्रतिशत समय दिया गया, लेकिन ये उनको तय करना है कि किसको बोलना है, हम कैसे रोक सकते हैं। वो तो वियतनाम थे, कैसे बोल सकते थे। मैं राहुल गांधी जी से पूछना चाहता हूं कि आपकी पार्टी को कितने घंटे बोलने के लिए समय दिया गया और आप क्यों नहीं बोले।
वक्फ विधेयक पर भी बोले शाह
इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने इस बात की पुष्टि भी की कि वक्फ (संशोधन) विधेयक मौजूदा संसद सत्र में पेश किया जाएगा। टाइम्स नाउ और टाइम्स नाउ नवभारत की एडिटर इन चीफ नाविका कुमार के साथ बातचीत में अमित शाह ने आश्वासन दिया कि इस विधेयक से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि 2013 में कांग्रेस पार्टी ने पार्लियामेंट के अंतिम सेशन में कोई लंबी बहस के बगैर वक्फ बिल को पारित कर लिया। इस बिल को पारित करके अपनी तुष्टिकरण की पॉलिसी को आगे बढ़ाने के लिए, वोटबैंक क्रिएट करने के लिए ढेर सारे ऐसे प्रावधान कर दिए, जो हमारे संविधान से ही मेल नहीं खाते। हम वक्फ बिल को संविधान के तहत संरक्षित करने का काम कर रहे हैं। कोई भी कानून संविधान के स्पिरिट से ऊपर नहीं हो सकता है।
RSS पर भी खूब बोले अमित शाह
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के योगदान को नापने का ना कोई सिस्टम बना है और ना ही स्केल से नापने की कोई पद्धति है। एक नागरिक को अच्छा नागरिक बनाना, राष्ट्रभक्त बनाना... इससे बड़ा योगदान देश के विकास के लिए हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि 100 साल से करोड़ों लोग ऐसे तैयार किए, जिन्होंने देशभक्त नागरिक के रूप में काम किया। मैं खुद स्वयंसेवक बना हूं, मुझे मालूम है कि मेरी सोच कैसे बनी... बहुत सारे आयामों को एक साथ रखकर कैसे सोचा जाता है? यह मैंने देखा है।
