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Landslide in Himachal Pradesh: हिमाचल में लैंडस्लाइड, किन्नौर का शिमला से टूटा संपर्क

Breaking News: हिमाचल प्रदेश में लैंडस्लाइन के चलते लोगों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। भूस्खलन से नेशनल हाईवे (NH-5) ब्लॉक हो गया। इस घटना के चलते किन्नौर का राज्य की राजधानी शिमला से संपर्क टूट गया है।

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हिमाचल में लैंडस्लाइड।

Photo : iStock

Landslide in Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले का राजधानी शिमला से संपर्क उस समय टूट गया, जब मंगलवार सुबह नेगुलसारी में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग) पर भूस्खलन हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, भूस्खलन में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।

बड़ी संख्या में फंसे पर्यटकों के वाहन और ट्रक

भूस्खलन के कारण राजमार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में पर्यटकों के वाहन और सेब से लदे ट्रक फंस गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि राजमार्ग को साफ करने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, पहाड़ों से गिर रहा मलबा काम में बाधा डाल रहा है। पिछले वर्ष नेगुलसारी में भूस्खलन के बाद, सेब सहित अन्य फसलों के परिवहन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी तथा यह सुनिश्चित किया गया था कि किसानों की उपज समय पर बाजार तक पहुंचे।

लेकिन रोपवे के जरिए सेब ले जाना एक कठिन और समय लेने वाला काम है। रोपवे नेगुलसारी के क्रम्पा और चौरा-रूपी लिंक रोड पर धुमती के बीच स्थापित किया गया था।

पिछले 24 घंटों से शुष्क बना हुआ है मौसम

स्थानीय मौसम विभाग ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 घंटों से मौसम शुष्क बना हुआ है तथा अगले दो-तीन दिनों में राज्य के अधिक हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून के वापस चले जाने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, 27 जून को पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मानसून के आगमन के बाद से वर्षाजनित घटनाओं में 186 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 28 लोग लापता हैं। बारिश के कारण राज्य को 1,360 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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