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'हाईवे मैन' नितिन गडकरी को फिर मिला बड़ा जिम्मा, लगातार तीसरी बार बने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री

Nitin Gadkari Portfolio: नितिन गडकरी को लगातार तीसरी बार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। महाराष्ट्र के नागपुर के 67 वर्षीय नेता गडकरी सबसे लंबे समय तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहे हैं। रविवार को उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर राजग सरकार में शामिल किया गया था।

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नितिन गडकरी लगातार तीसरी बार बने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री।

Photo : Times Now Digital

Nitin Gadkari Portfolio: ‘हाईवे मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी को लगातार तीसरी बार केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री बनाया गया है। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। महाराष्ट्र के नागपुर के 67 वर्षीय नेता गडकरी सबसे लंबे समय तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की नई सरकार में भी वह फिर से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का जिम्मा संभालेंगे।

गडकरी को दी जाती है हाईवे मैन की उपाधि

पिछले 10 साल में देश में 54,858 किलोमीटर से अधिक लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण का श्रेय गडकरी को दिया जाता है। उनके नेतृत्व में सड़क मंत्रालय का लक्ष्य इस साल दिसंबर तक 1,386 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा करना है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के करीबी माने जाने वाले पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने नागपुर सीट से लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीता है। नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय भी है। रविवार को उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर राजग सरकार में शामिल किया गया था।

2009 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे गडकरी

राष्ट्रीय राजनीति में गडकरी का प्रवेश 2009 में हुआ था, जब उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वर्ष 2014 में गडकरी ने नागपुर से लोकसभा चुनाव में पदार्पण किया और वह केंद्र सरकार में मंत्री बने। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम, पोत परिवहन, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे कई विभागों को संभाला।

महाराष्ट्र में गडकरी के नाम दर्ज हैं ये उपलब्धियां

नितिन गडकरी 1989 से 2014 तक नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य के रूप में चुने जाते रहे। वह 1995 में पहली बार महाराष्ट्र में राज्यमंत्री बने और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का प्रभार संभाला। इस दौरान गडकरी ने राज्य में सभी मौसम में कारगर सड़कों का निर्माण कराने और विदर्भ क्षेत्र के मेलघाट क्षेत्र में कुपोषण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए काम किया।

राज्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और महाराष्ट्र की राजधानी में 54 फ्लाईओवर बनाए गए थे। बांद्रा-वर्ली सी लिंक की परिकल्पना भी पीडब्ल्यूडी मंत्री के रूप में गडकरी के कार्यकाल में ही की गई थी। देश में भारतमाला परियोजना चरण-एक के तहत शुरू की गई नई एक्सप्रेसवे परियोजनाएं पूरी होने के विभिन्न चरणों में हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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