उत्तराखंड से कुछ गिने-चुने नेताओं ने ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनमें से एक नाम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत का भी है। हरीश रावत एक मंझे हुए राजनेता होने के साथ ही बहुत ही सहज व्यक्ति भी हैं। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका राजनीतिक जीवन अब भी जारी है। उत्तराखंड में सरकार के विरोध में उठने वाली सबसे ऊंची आवाज आज भी हरीश रावत की ही होती है। टाइम्स नाउ नवभारत के साथ एक इंटरव्यू में हरीश रावत ने अपने बचपन के मास्टर जी को भी याद किया और 2027 व 2029 की राजनीतिक संभावनाओं पर भी चर्चा की।
बचपन और गुरुओं को याद किया
इस इंटरव्यू की शुरुआत में ही हरीश रावत के बचपन और उनके गुरुओं के प्रति उनके लगाव पर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन के गुरु चिंताराम जी और भीम सिंह जी को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने गुरुजी को एक लाठी दी थी, ताकि वह जरूत पड़ने पर उन्हें सुधार सकें और इस लाठी को महीने-15 दिन में 'रीचार्ज' भी किया जाता था। हरीश रावत आज भी अपने गुरुओं को उनके प्रेम और मार्गदर्शन के प्रतीक के रूप में याद करते हैं।
जब हरीश रावत ने काट दी गुरुजी की चोटी
इस इंटरव्यू के दौरान हरीश रावत ने एक रोचक किस्सा भी टाइम्स नाऊ नवभारत के दर्शकों के साथ साझा किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने मित्र मोहन के साथ मिलकर अपने हेडमास्टर भीम सिंह जी की 'चोटी काट दी थी।' क्योंकि हेडमास्टर जी सोते समय बच्चों की चोटी अपनी चोटी से बांध देते थे, ताकि कोई सो न सके। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि वे अपने कॉलेज के टीचर्स को शायद भूल जाएं, लेकिन बचपन के गुरुओं का चेहरा उनके दिमाग में आज भी दर्ज है। उनका तो यहां तक कहना है कि अगर वह कलाकार होते तो उनकी तस्वीर बना देते।

भाजपा की नकारात्मकता नहीं, कांग्रेस के 'सकारात्मक एजेंडे' से सत्ता में आएंगे - हरीश रावत
चावल का कट्टा और राजनीतिक सौहार्द
हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हरीश रावत की 'चावल के कट्टे के आदान-प्रदान' की एक तस्वीर वायरल हुई थी। इस वायरल तस्वीर पर बात करते हुए हरीश रावत ने कहा, राजनीति में प्रतिद्वंद्विता अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत सौहार्द बना रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने हाथ से बोए हुए चावल भेंट किए थे, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अटल जी ने एक बार संसद में उनके आक्रामक भाषण की प्रशंसा करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया था। हरीश रावत का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रभावशाली हो सकते हैं, लेकिन वे कभी 'नेहरू या अटल जी' के स्तर की सहनशीलता तक नहीं पहुंच सकते।
पार्टी में मार्गदर्शक की भूमिका में 'हरदा'
टाइम्स नाउ नवभारत ने जब हरीश रावत से पूछा कि क्या वे खुद को साइड लाइन महसूस कर रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अब एक 'मार्गदर्शक की भूमिका' में हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अब नए और अनुभवी लोगों को अवसर मिलना चाहिए और मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका निर्णय पार्टी लीडरशिप करेगी। उनका मुख्य लक्ष्य पार्टी को बहुमत दिलाना और वातावरण बनाना है।
अल्मोड़ा से हरिद्वार तक की दौड़
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए बताया कि उन्होंने देश के सबसे कम उम्र के ब्लॉक प्रमुख बनने से शुरुआत की थी। उन्होंने डॉ. मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेता के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा उनका मूल घर है, लेकिन हरिद्वार ने उन्हें तब सहारा दिया, जब वे राजनीतिक रूप से कठिन परिस्थितियों में थे। हरीश रावत स्वयं को हरिद्वार और गांधी-नेहरू परिवार के प्रति कर्तव्यबद्ध मानते हैं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का पूरा इंटरव्यू यहां देखें
उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों पर हरीश रावत की राय
- पहाड़ बनाम मैदान : पूर्व मुख्यमंत्री ने पहाड़ बनाम मैदान की लड़ाई को मूर्खतापूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का अस्तित्व एक साझी संस्कृति से है, जिसे उन्होंने 'उत्तराखंडियत' का नाम दिया है।
- अंकिता भंडारी हत्याकांड : इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री गहरा दुख जताते हुए इसे सत्ता का 'गहरा पाप' बताते हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता ने अपनी गरिमा से समझौता नहीं किया और प्राण दे दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में वीआईपी चेहरों को बचाया जा रहा है।
- पेपर लीक : वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि पेपर लीक से गरीब बच्चों के सपने टूटते हैं और इसमें शासन-प्रशासन के प्रभावशाली लोग संलिप्त हैं। उन्होंने वादा किया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो एक पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर लागू किया जाएगा।
2027 उत्तराखंड और 2029 में केंद्र की संभावनाएं
इंटरव्यू के अंत में उन्होंने 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के प्रति आत्मविश्वास जताया। उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है जहां मतभेद हो सकते हैं, लेकिन वे 2027 में भाजपा के चक्र को तोड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। पूर्व मुख्यमंत्री का मानना है कि उत्तराखंड से जीत की शुरुआत होकर 2029 में केंद्र में इंडिया गठबंधन की वापसी हो सकती है। 'हरदा' ने अंत में कहा, वे चाहते हैं कि लोग कांग्रेस को सिर्फ भाजपा की नकारात्मकता के आधार पर नहीं, बल्कि कांग्रेस के 'सकारात्मक एजेंडे' के आधार पर वोट दें।
