HAL हुई बाहर, अब इंडियन एयरफोर्स के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स बनाएंगी ये प्राइवेट कंपनियां, AMCA पर आया बड़ा अपडेट
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Feb 7, 2026, 08:32 AM IST
IAF News: AMCA का फैसला एक मिसाल बन सकता है। अगर प्राइवेट कंपनियां भारत का पहला स्टील्थ फाइटर सफलतापूर्वक बनाती हैं, तो यह डिफेंस प्रोडक्शन के एक नए मॉडल को सही साबित करेगा।
अब इंडियन एयरफोर्स के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स बनाएंगी ये प्राइवेट कंपनियां
Indian Air Force AMCA Program: भारत की स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को बनाने की महत्वाकांक्षी योजना में एक बड़ा मोड़ आया है। सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अब इस विमान को बनाने की दौड़ में नहीं है। इसके बजाय, प्राइवेट सेक्टर की कंपनियां- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro), और भारत फोर्ज (Bharat Forge), को उनकी क्षमताओं के टेक्निकल मूल्यांकन के बाद शॉर्टलिस्ट किया गया है।
दशकों तक, HAL ने भारत के फाइटर एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में लगभग एकाधिकार का दौर देखा। मुख्य रूप से इसलिए भी, क्योंकि भारतीय वायु सेना (IAF) उसका मुख्य ग्राहक और सबसे महत्वपूर्ण स्पॉन्सर दोनों थी। इस रिश्ते ने काम का एक स्थिर प्रवाह सुनिश्चित किया, सोवियत-युग के जेट विमानों के लाइसेंस वाले प्रोडक्शन से लेकर तेजस जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों तक। ऐसा नहीं है कि HAL को इस प्रोजेक्ट से बाहर होना पड़ा तो अब उसपर काम नहीं है। फिलहाल HAL के काम पर शायद ही कोई असर पड़ेगा, क्योंकि कंपनी की ऑर्डर बुक और अपग्रेड कमिटमेंट अगले कम से कम दो दशकों तक इसकी फैक्ट्रियों को व्यस्त रखेंगे। फिर भी, AMCA का फैसला एक बड़ा संकेत देता है कि भविष्य के प्रमुख कार्यक्रम अब HAL को नहीं मिलेंगे।
पहले से बदलाव दिखना शुरू हुआ
यह बदलाव सैन्य विमानन के अन्य क्षेत्रों में भी पहले से ही दिखाई दे रहा है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड भारत में C-295M ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बना रही है, जो पहली बार है जब किसी भारतीय प्राइवेट फर्म ने घरेलू स्तर पर सैन्य ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के प्रोडक्शन में नेतृत्व किया है। आगे देखें तो, कई प्राइवेट कंपनियां IAF के प्रस्तावित मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) कार्यक्रम के लिए खुद को तैयार कर रही हैं, जहां ग्लोबल OEM स्थानीय प्रोडक्शन के लिए HAL के बजाय प्राइवेट इंडस्ट्री के साथ साझेदारी करने को ज्यादा इच्छुक हैं।
हेलिकॉप्टर सेगमेंट में भी दूसरी कंपनियां दे रही HAL को चुनौती
हेलिकॉप्टर सेगमेंट में भी दबाव बढ़ रहा है। टाटा और अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस जैसे प्राइवेट ग्रुप इंटरनेशनल पार्टनरशिप के जरिए भारत में बने हेलिकॉप्टर पेश कर रहे हैं, जो रोटरी-विंग प्लेटफॉर्म में HAL के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती दे रहे हैं। यहां तक कि अनमैन्ड सिस्टम में भी, जिसे पारंपरिक रूप से HAL के लिए भविष्य में ग्रोथ का एरिया माना जाता था, अब उसमें भी मुकाबला तेज हो रहा है। कई प्राइवेट कंपनियां IAF के लिए लॉयल विंगमैन और UCAV-क्लास प्लेटफॉर्म के लिए कॉन्सेप्ट डेवलप कर रही हैं, अक्सर अपनी खुद की टेक्नोलॉजी के साथ, जिससे HAL के लिए खुद को नेचुरल प्राइम कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर स्थापित करने की गुंजाइश कम हो रही है।
अडानी कंपनी बना रही ड्रोन
UAV सेक्टर में, बैलेंस पहले ही प्राइवेट सेक्टर की तरफ झुक गया है। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ भारत में Hermes 900 MALE UAV बना रहा है, जबकि एक दर्जन से ज्यादा भारतीय कंपनियां सशस्त्र बलों को MALE और HALE-क्लास ड्रोन सप्लाई करने के लिए मैदान में मुकाबला कर रही हैं। HAL ने खुद शुरू से कोई स्वदेशी MALE या HALE UAV डिजाइन नहीं किया है। इसके बजाय इसने आर्चर-NG और तपस जैसे प्रोग्राम में प्रोडक्शन पार्टनर के तौर पर काम किया है और अब इन दोनों को भी प्राइवेट सेक्टर से कड़ी टक्कर मिल रही है।
सिविल एविएशन भी अब कोई पक्की पनाहगाह नहीं रहा। HAL का रूस के साथ सुखोई SSJ-100 को भारतीय बाजार में लाने का हालिया समझौता, एम्ब्रेयर और उन प्राइवेट भारतीय ग्रुप्स से मुकाबले में आ गया है जो 19-सीटर रीजनल एयरक्राफ्ट लाने की योजना बना रहे हैं। ये प्रोजेक्ट HAL के अपने डॉर्नियर Do-228 प्रोग्राम को सीधे चुनौती दे सकते हैं, जिसे लंबे समय से रीजनल कनेक्टिविटी और यूटिलिटी कामों के लिए घरेलू समाधान के तौर पर देखा जाता रहा है।
HAL अभी जरूरी, लेकिन आगे कमजोर होगी पकड़
कुल मिलाकर, AMCA मैन्युफैक्चरिंग की दौड़ से HAL का बाहर होना गिरावट का संकेत नहीं है, लेकिन यह ऑटोमैटिक विशेषाधिकार के खत्म होने का संकेत जरूर है। सरकार प्राइवेट सेक्टर में एक पैरेलल एयरोस्पेस-इंडस्ट्रियल बेस बनाने पर जोर दे रही है, जो ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर से लेकर स्टील्थ फाइटर और मानवरहित सिस्टम तक, हाई-एंड प्लेटफॉर्म को संभालने में सक्षम हो। मौजूदा फ्लीट को बनाए रखने और अपग्रेड करने के लिए HAL जरूरी रहेगा, लेकिन भविष्य के प्रोग्राम पर उसकी पकड़ साफ तौर पर कमजोर हो रही है।
भारत का पहला स्टील्थ फाइटर
रणनीतिक लिहाज से AMCA का फैसला एक मिसाल बन सकता है। अगर प्राइवेट कंपनियां भारत का पहला स्टील्थ फाइटर सफलतापूर्वक बनाती हैं, तो यह डिफेंस प्रोडक्शन के एक नए मॉडल को सही साबित करेगा, जहां सरकारी कंपनियां इंडस्ट्रियल माहौल पर हावी होने के बजाय साथ मिलकर काम करेंगी। HAL के लिए संदेश साफ है: उसका मौजूदा काम सुरक्षित है, लेकिन भारत की अगली पीढ़ी की हवाई ताकत को आकार देने में उसकी भूमिका विरासत की स्थिति पर कम और तेजी से बढ़ते और महत्वाकांक्षी घरेलू बाजार में मुकाबला करने की उसकी क्षमता पर ज्यादा निर्भर करेगी।
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