Asaduddin Owaisi on Gyanvapi Case: उत्तर प्रदेश (यूपी) के वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के सर्वे को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने आशंका जताई है कि एएसआई की रिपोर्ट आने के बाद ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) नैरेटिव सेट करने लगेंगे और ऐसे में उन्हें डर है कि कहीं फिर से छह दिसंबर 1992 की बाबरी विध्वंस सरीखी घटना न हो जाए।
शनिवार (पांच अगस्त, 2023) को उन्होंने इस बारे में समाचार एजेंसी को बताया, "एएसआई की जब रिपोर्ट आएगी, तब बीजेपी और आरएसएस नैरेटिव सेट करेगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट का आर्डर आने से पहले यूपी के सीएम ने 'बिल्डिंग पुकार-पुकार' से जुड़ा बयान दे दिया। वह नैरेटिव सेट कर रहे थे। ऐसा ही एएसआई की रिपोर्ट आने के बाद पूरे देश में नैरेटिव सेट किया जाएगा।"
वह आगे बोले- हम उम्मीद करते हैं कि न हो, मगर हमें इस बात का डर है कि कहीं छह दिसंबर 1992 (अयोध्या में बाबरी विध्वंस के संदर्भ में) न हो जाए। हमें यह आशंका है...हम नहीं चाहते हैं कि ऐसे कई सारे बाबरी मस्जिद वाले केस खुल जाएं। आप लोगों को याद दिला रहा हूं कि जब बाबरी मस्जिद का फैसला आया था तब मैंने कहा था कि यह सब मसले बढ़ेंगे।
देखिए, ओवैसी साहब ने आगे और क्या कहा?:
ओवैसी ने इससे पहले ट्वीट किया था, "उम्मीद है कि 23 दिसंबर और छह दिसंबर की घटनाएं दोहराई नहीं जाएंगी और पूजा स्थल अधिनियम की शुचिता के संबंध में अयोध्या मामले के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गयी टिप्पणी का अनादर नहीं किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने आगे ट्वीट किया, (अगर) एएसआई की ओर से ज्ञानवापी की सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है, तो कौन जानता है कि इसका असर क्या होगा। उम्मीद की जाती है कि 23 दिसंबर और छह दिसंबर की पुनरावृत्ति नहीं होगी। पूजा स्थल अधिनियम की शुचिता के संबंध में ‘अयोध्या मामले’ के फैसले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का अनादर नहीं किया जाना चाहिए। आशा है कि इससे हजारों ‘बाबरी मस्जिदों’ के द्वार नहीं खोले जाएंगे।
