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एक और पायलट ने कहा मेडे! गुवाहाटी से चेन्नई जा रही इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग; सवार थे 168 यात्री

गुवाहाटी से चेन्नई जा रहे इंडिगो के विमान को बीच हवा में ईंधन आपातकाल घोषित किए जाने के बाद बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। एयरबस A321 विमान, जो उड़ान संख्या 6E-6764 के रूप में संचालित हो रहा था, 168 यात्रियों को लेकर जा रहा था।

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(सांकेतिक तस्वीर)

Photo : PTI

अहमदाबाद विमान हादसे के बाद शुक्रवार को एक और विमान हादसा होते-होते टल गया है। इस बार गुवाहाटी से चेन्नई जा रहे इंडिगो के विमान को बीच हवा में ईंधन आपातकाल घोषित किए जाने के बाद बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। एयरबस A321 विमान, जो उड़ान संख्या 6E-6764 के रूप में संचालित हो रहा था, जिसमें 168 यात्री सवार थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सुरक्षित तरीके से विमान को उतार लिया, तब यात्रियों ने राहत की सांस ली।

यह एक फ्यूल मेडे कॉल था

शुक्रवार को फ्लाइट चेन्नई पहुंच गई थी, लेकिन भीड़भाड़ के कारण लैंड नहीं कर पाई। लिहाजा, पायलट इन कमांड ने फ्लाइट को बेंगलुरु की ओर मोड़ दिया और फ्यूल मेडे (फ्यूल इमरजेंसी कॉल) दिया, जिसके बाद तुरंत फ्लाइट को प्राथमिकता के आधार पर लैंड करने की अनुमति मिल गई। इमरजेंसी मेडे का मैसेज देने वाले पायलट को पद से हटा दिया गया है।

कब होता है मेडे कॉल?

अहमदाबाद विमान क्रैश के बाद मेडे शब्द लोगों के जेहन में है। तो आपको बता दें यह कॉल पायलट एयर ट्रैफिक कॉल को तब देता है, जब कोई आपात स्थिति होती है या उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं रह जाता है। मेडे शब्द सुनते ही जितना वक्त होता है उसमें विमान को सुरक्षित करने की कोशिश होती है। कभी कभार ज्यादा खतरा होने पर पायलट सिर्फ मेडे मेडे मेडे ही कह पाते हैं और हादसे हो जाते हैं, इसका उदाहरण अहमदाबाद विमान हादसा है, जो महज 45 सेकेंड में क्रैश हो गया और 241 से अधिक लोग मारे गए।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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