ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दुनिया की सबसे बड़े टेक कंपनी गूगल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। पीएम को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने कहा है कि गूगल के नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जेमिनी पर प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश हो रही है।
गूगल के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म जेमिनी ने भारत के प्रधानमंत्री के बारे में बहुत ही निंदनीय और गलत जानकारी सार्वजनिक डोमेन में डाली है, जो इनकी छवि को नुकसान पहुंचा रही है। कंपनी पर आरोप लगाते हुए पीएम मोदी को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में कहा गया है कि इस AI की निर्माता होने के नाते कंपनी को इससे होने वाले नुकसान के परिणामों की जिम्मेदारी से भी नहीं बच सकती।
डॉक्टर अग्रवाल का कहना है कि मशीन जिन भी तरीकों से तथ्यों को सीखती है और उनकी व्याख्या करती है वह गूगल के प्रोग्रामर द्वारा ही डिजाइन किया जाता है।
गूगल के खिलाफ दर्ज हो मुकदमा
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील आदिश अग्रवाल के मुताबिक गूगल के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 500 और 505 के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए क्योंकि उसने अपने सर्च इंजन के जरिए दो वर्गों के बीच वैमनस्यता फैलाने की कोशिश की है। वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि ऐसी कृत्यों को अंजाम देने वाले के खिलाफ कानून के हिसाब से कार्रवाई हो और कड़ी से कड़ी सजा मिले।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में आगे कहा है कि भारत में कुछ दिनों में ही लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं ऐसे में किसी भी नेता के खिलाफ भ्रामक और झूठी जानकारी देकर गूगल अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता है। कुछ लोग ऐसे हैं जो देश के आगे बढ़ने पर उत्साहित नहीं हैं और द्वेष फैलाकर इसके सम्मान को खराब करना चाहते हैं।
Gemini को लेकर दुनिया भर में आलोचना झेल रहा है गूगल
माफी मांगते हुए सुंदर पिचाई ने कहा था, "गूगल के जेमिनी एआई ने गलत इतिहास बताने वाली तस्वीरें और टेक्स्ट जेनरेट कर यूजर्स को नाराज किया है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।" साथ ही पिचाई ने ये भी सफाई दी थी कि कोई भी एआई परफेक्ट नहीं है, विशेष तौर से तब जब ये इंडस्ट्री उभरते हुए फेज में है।
