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IVRI की रिपोर्ट पर मचा हंगामा, RSS से जुड़े इस संगठन ने गौ मूत्र को पूरी तरह बताया सुरक्षित

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 18, 2023, 03:11 PM IST

Cow Urine: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र (GVAK) ने कहा है कि गौ मूत्र पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, उसका सेवन सही तरीके से किया जाए।

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गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने गौ मूत्र पर आईवीआरआई की रिपोर्ट का किया खंडन।

Photo : BCCL

Cow Urine: भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान(IVRI) की हालिया रिपोर्ट को लेकर हंगामा मचा हुआ है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गौ मूत्र का सीधा सेवन मनुष्यों के लिए हानिकारक है। अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र (GVAK) ने इस रिपोर्ट पर निशाना साधा है।

गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र ने गौ मूत्र पर आईवीआरआई की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से सुरक्षित है। इस रिपोर्ट ने गौमूत्र को लेकर संदेह पैदा किया है। बता दें, गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र गौ उत्पादों पर शोध करता है और यह स्वदेशी गोवंश का प्रबल समर्थक भी है।

रिपोर्ट पर खड़े किए सवाल

GVAK की ओर से सुनील मानसिंगा ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए आईवीआरआई की रिपोर्ट पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, गौ मूत्र पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि, हमेशा ताजे गौ मूत्र का सेवन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, जो लोग गौ मूत्र का सेवन करते हैं, उन्हें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि गाय देशी नस्ल की हो और वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हो। प्रेसवार्ता में मौजूद अन्य लोगों ने भी इस बात को स्वीकार किया कि वे गौ मूत्र का सेवन करते हैं, जिससे वे पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं।

आईवीआरआई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

इस रिपोर्ट को लेकर आईवीआरआई के खिलाफ विदिशाा में एक शिकायत भी दर्ज की गई है, जिसमें कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं मानसिंगा ने कहा, वह इस मामले को सरकार और विशेषकर आयुष मंत्रालय के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा, यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब ऐलोपैथिक डॉक्टर भी गौ मूत्र के सेवन की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने कहा, गौ मूत्र में एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी जीन टॉक्सिटी गुण होते हैं, जो कैंसर तक रोकने में मददगार साबित होते हैं। उन्होंने बताया, हर साल करीब 20 हजार लीटर गौमूत्र से दवाएं बनाई जा रही हैं।

जल्दबाजी में तैयार की गई रिपोर्ट

उन्होंने कहा, आईवीआरआई की हालिया रिपोर्ट दुर्भावनापूर्ण इरादे से जल्दबाजी में की गई है। इसने भैंसों और मनुष्यों के अलावा 40 गायों के नमूने लिए हैं। मानसिंगा ने कहा कि आइवीआरआई का कहना है कि गौ मूत्र में बैक्टीरिया विकसित होते हैं, हालांकि इस रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि परीक्षण से पूर्व कितनी देर पहले गौ मूत्र के नमूने लिए गए थे।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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