Ghulam Nabi Azad Memoir Azad: गुलाम नबी आजाद किसी पहचान के मोहताज नहीं। वो कांग्रेस के बड़े चेहरों में से एक रहे, सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी निभाई। कांग्रेस में रहते हुए उन्हें जी-23 का अगुवा माना गया। लेकिन अब उनकी राह कांग्रेस से अलग है। उन्होंने भारतीय राजनीति में पांच दशक के अनुभवों को अपने संस्मरण 'आजाद' में कलमबद्ध किया है। अपने संस्मरण में वो कांग्रेस के लिए Bloopers and Bombast का जिक्र करते हैं। ब्लूपर्स का अर्थ शर्त और गलतियां होती है तो बंबास्ट का मतलब आडंबर होता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आचरण कुछ ऐसा ही रहा है।
मोदी जैसा कोई दूसरा नहीं कर सकता
नरेंद्र मोदी के साथ उनका व्यवहार हमेशा दोस्ताना रहा। प्रधानमंत्री के तौर पर उनके बारे में वो कहना चाहेंगे कि जो भी विचार बाहर है बिल्कुल वैसा नहीं है। उनके विचार व्यापक हैं। मैं कभी भी उनके आधिकारिक कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं बना। सदन में उनको कभी बख्शा भी नहीं। बावजूद मेरे बारे में उन्होंने खुलकर तारीफ की। ऐसा कोई दूसरा नहीं कर सकता। उन्होंने नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी में कुछ समानता भी देखी।
'मैं आजाद आवाज'
जम्मू-कश्मीर में अपनी पार्टी के प्रदर्शन के बारे में कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि वो कुछ सीट जीतकर विपक्ष की भूमिका में आएंगे। उनका मानना है कि उनकी आवाज निष्पक्ष होगी। वो पहले से बनाई गई धारणा पर काम नहीं करेंगे। वो सिर्फ और सिर्फ अपना काम करेंगे। जो अच्छा होगा उसकी सराहना और जो खराब उसकी आलोचना। देश का नागरिक होने के नाते जो देश के खिलाफ होगा उसका विरोध करेंगे चाहे वो कोई भी हो, या कोई राजनीतिक दल हो या कोई विचारधारा हो। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो वाईएसआर कांग्रेस या बीजू जनता दल की तरह भूमिका निभाएंगे तो इस सवाल के जवाब में कहा कि आप उनसे तुलना नहीं कर सकते। उनके विचार बंधे नहीं पूरी तरह से खुले और आजाद हैं यही वजह है कि उनके नाम के आखिर में आजाद है, उनकी पार्टी के नाम में भी आजाद और संस्मरण भी आजाद है। वो किसी भी राजनीतिक दल को दुश्मन नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धी मानते हैं।
