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Kumar Vishwas Death Threat: कुमार विश्वास को मिली जान से मारने की धमकी, गाजियाबाद पुलिस ने दर्ज किया केस

Kumar Vishwas Death Threat: कुमार विश्वास इन दिनों सिंगापुर में 8 सितंबर से 13 सितंबर तक श्रीराम कथा कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें फोन करके धमकी दी गई है, जिसमें राम का गुणगान करने से मना किया गया है। इस घटना को लेकर कुमार विश्वास ने भी 'एक्स' पर पोस्ट किया है।

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कुमार विश्वास को मिली जान से मारने की धमकी।

Photo : Twitter

Kumar Vishwas Death Threat: प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास को जान से मारने की धमकी मिली है। उन्हें एक नंबर से कॉल करके यह धमकी दी गई है। इस मामले में कुमार विश्वास के मैनेजर की तरफ से गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसमें कहा गया है कि किसी ने डॉ. कुमार विश्वास को फोन करके धमकी दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(4) के तहत मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

वसुंधरा में रहने वाले कुमार विश्वास के मैनेजर प्रवीन पांडेय की शिकायत के मुताबिक, कुमार विश्वास को राम कथा बंद करने के लिए धमकी दी गई है। इस घटना के बारे में कुमार विश्वास ने भी एक्स पर पोस्ट किया है। एक पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, जैसे इन जैसे खर-दूषणों के धमकाने से देश राघवेंद्र राम का गुणगान सुनना बंद कर देगा और हम करना। उन्होंने आगे लिखा, सीताराम चरित अति पावन। मधुर सरस अरु अति मनभावन। पुनि पुनि कितनेहू सुनत सुनाये।हिय की प्यास बुझत न बुझाए।

सिंगापुर में हैं कुमार विश्वास

कुमार विश्वास इन दिनों सिंगापुर में हैं। वह यहां 8 से 13 सिंतबर तक रामकथा कर रहे हैं। इस बीच उनके मैनेजर को फोन पर कॉल करके यह धमकी दी गई है। मैनेजर प्रवीण पांडेय के अनुसार, 7 सितंबर की शाम करीब 6 बजे उनके फोन पर एक कॉल आई। कॉलर ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए डॉ. कुमार विश्वास को सीधे धमकी दी है। उन्होंने कहा, कॉलर ने डॉ. विश्वास के लिए जिस भाषा का प्रयोग किया, वह वाकई चिंताजनक है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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