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G-20 Meeting: डल झील में MARCOS, आसमान में NSG; घाटी में मेहमानों की मौजूदगी के बीच Indian Forces का अभेद चक्रव्यूह

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 22, 2023, 02:05 PM IST

G20 summit Kashmir: श्रीनगर की डल झील के किनारे होने जा रही इस बैठक के लिए देश के सबसे खतरनाकर मार्कोस कमांडोज को उतारा गया है। आसमानी सुरक्षा का जिम्मा नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (NSG) को सौंपा गया है। इन कमांडोज को लाल चौक पर भी डेरा डाल रखा गया है। इसके अलावा तीसरा घेरा जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का होगा, जिन्हें किसी भी हमले के समय कवर सुरक्षा देने के लिए तैनात किया गया है।

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डल झील पर पेट्रोलिंग करते सीआरपीएफ कमांडोज

Photo : IANS

G20 Summit Kashmir: जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद घाटी के हालात काफी तेजी से बदले हैं। धीरे-धीरे वहां अमन-चैन बहाल हो रहा है। हालांकि, बीच-बीच में आतंकी घटनाएं सरकार के लिए एक चुनौती जरूर बनी हुई हैं, जिसके चलते बीते दिनों जम्मू-कश्मीर से चरणबद्ध तरीके से सशस्त्र बलों की वापसी का फैसला रद्द कर दिया गया था। इस बीच भारत सरकार ने घाटी को अशांत बनाने की कोशिश में जुटे आतंकियों को खुली चुनौती दे डाली है। दरअसल, सरकार की ओर से आज (सोमवार) श्रीनगर में जी-20 पर्यटन कार्यसमूह की बैठक का आयोजन किया जा रहा है।

धारा 370 हटने के बाद घाटी में यह इस तरह का यह पहला आयोजन है। यह तीन दिवसीय बैठक डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की जाएगी, जिसमें जी-20 देशों के 60 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आतंकी चुनौतियों और तमाम विकट परिस्थितियों के बीच इस बैठक के लिए भारत सरकार ने श्रीनगर को चुना है, ऐसे में दुनिया के तमाम देशों की नजरें इस समय भारत की ओर है। भारत सरकार ने भी इस बैठक के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए सबसे खतरनाक मार्कोस और एनएसजी के कमांडोज को उतारा गया है। ऐसे में इनकी निगेहबानी में होने जा रही बैठक में परिंदे का भी पर मार पाना काफी मुश्किल है।

तीन लेयर में होगी डेलिगेट्स की सुरक्षा

श्रीनगर की डल झील के किनारे होने जा रही इस बैठक के लिए देश के सबसे खतरनाकर मार्कोस कमांडोज को उतारा गया है। जानकारी के मुताबिक, इन कमांडोज को डल झील पर तैनात किया गया है, जिससे इस झील के सहारे किसी भी हमले को नेस्तनाबूत किया जा सके। इसके अलावा आसमानी सुरक्षा का जिम्मा नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड (NSG) को सौंपा गया है। आसमान में ड्रोन के जरिए भारत के सबसे भरोसेमंद कमांडोज आसमान से निगेहबानी करेंगे। इसके अलावा इन कमांडोज को लाल चौक की सुरक्षा का जिम्मा भी सौंपा गया है। इसके अलावा तीसरा घेरा जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) का होगा, जिन्हें किसी भी हमले के समय कवर सुरक्षा देने के लिए तैनात किया गया है।

यातायात पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं

भारत सरकार की ओर से सुरक्षा के इंतजाम इतने पुख्ता किए गए हैं कि किसी भी परिंदे का पर भी मार पाना काफी मुश्किल है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक,प्रतिनिधियों का स्वागत करने के लिए सड़कों और दीवारों को सजाया गया है। इसके अलावा किसी भी तरह के पब्लिक मूवमेंट या दुकानों को भी बंद नहीं किया गया है, जिससे घाटी में सुरक्षा की भावना को बढ़ाया जा सके।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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