मंत्री भुट्टो ने इससे पहले अपने दौरे को लेकर बताया था कि भारत में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) की कोशिश रही है कि दुनिया भर के सारे मुसलमानों को दहशतगर्द करार दे दो। फिर चाहे वे मुस्लिम लोग भारत में रहते हों या फिर उन्हें पाकिस्तानी नजर आ जाता है, उन्हें सब आतंकी दिखते हैं। हमारी ओर से इसी भ्रम को तोड़ने की कोशिश की गई।
उन्होंने यह भी कहा, "हम इस चीज की निंदा करते हैं और इसका जवाब भी देंगे, मगर जी-20 करना ही इनके अहंकार को दर्शाता है।" जी-20 की बैठक से ऐन पहले भुट्टो के इस तेजाबी बयान से समझा जा सकता है कि वह ऐसा करके मुसलमानों को हिंदुस्तान के खिलाफ भड़काना चाहते हैं। 23 मई को पीओके के बाग (श्रीनगर से 100 किमी दूर) जिले में कश्मीरी शरणार्थियों से मिलेंगे और वहां से वह घड़ियाली आंसू बहाते हुए दुनिया को गुमराह करने का प्रयास करेंगे।
वैसे, पाकिस्तान के साथ चीन ने जी-20 मीटिंग की मुखालफत करते नजर आए। हालांकि, भारत का रुख स्पष्ट है कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा और हिंदुस्तान यह सम्मेलन अपनी सरजमीं पर कराने के लिए स्वतंत्र है। रोचक बात यह है कि जी-20 पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री का यह स्टैंड तब देखने को मिला है, जब दुनिया वैश्विक नेता बन चुके मोदी का इस्तकबाल कर रही है और इस बीच पाक के लोग तक मान चुके हैं कि मोदी जैसा और कोई नेता नहीं है। मौजूदा समय में पाकिस्तान आर्थिक मंदी, सियासी संकट और बेतहाशा महंगाई का सामना कर रहा है।
