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G20 Security: दिल्ली में दुनियाभर के सीक्रेट एजेंट्स ने डाला डेरा, NSG-HIT से लेकर सेना के स्नाइपर रखेंगे 24 घंटे नजर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 29, 2023, 04:18 PM IST

G20 Security: दिल्ली में होने वाले जी20 शिख सम्मेलन के लिए भारत की खुफिया एजेंसी IB और RAW ने एक खास डेस्क बनाया है, जो अमेरिका की CIA, चीन की MSS, ब्रिटेन की MI-6 जैसी खुफिया एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है और तालमेल बिठाकर काम कर रही है।

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जी20 समिट के दौरान चप्पे-चप्पे पर होगी खुफिया एजेंसियों की नजर

Photo : BCCL

G20 Security: राजधानी दिल्ली में अगले महीने यानी सितंबर में जी-20 का शिखर सम्मेलन होना है। इस आयोजन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, चीन के शी जिनपिंग, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक समेत दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष शिरकत करेंगे। इस खास आयोजन के लिए दिल्ली में 8, 9 व 10 सितंबर को छुट्टी घोषित कर दी गई है। स्कूल-कॉलेज से लेकर बाजारों को भी बंद कर दिया गया है। सुरक्षा के लिहाज से चप्पे-चप्पे पर नजर भी रखी जा रही है।

सबसे खास बात यह है कि सिर्फ भारत की IB और RAW ही नहीं CIA,MI-6,MSS जैसी खुफिया एजेंसियां भी दिल्ली पर नजरें जमाए हुए हैं और 24 घंटे भारतीय खुफिया एजेंसियों के साथ तालमेल बिठा रही हैं। सूत्रों की मानें तो कई खुफिया एजेंसियों के सीक्रेट एजेंट्स ने दिल्ली में डेरा भी जमा लिया है और हर संदिग्ध गतिविधि पर उनकी नजर है।

RAW और IB ने बनाई खास डेस्क

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, IB और RAW ने एक खास डेस्क बनाया है, जो अमेरिका की CIA, चीन की MSS, ब्रिटेन की MI-6 जैसी खुफिया एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है और तालमेल बिठाकर काम कर रही है। इसके अलावा जी-20 सम्मेलन के लिए दिल्ली पुलिस, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG), अर्धसैनिक बलों के साथ सेना के अधिकारियों को भी सम्मेलन स्थल के पास तैनात किया गया है, जो जमीन से लेकर आसमान तक नजरें टिकाए हुए हैं। NSG की एक दर्जन से ज्यादा टीमों की तैनाती कार्यक्रम स्थल वाली जगहों के आसपास की गई हैं।

ड्रोन से रखी जाएगी नजर, AI मॉड्यूल से होगी जांच

दिल्ली के आसमान की सुरक्षा अचूक करने के लिए एयरफोर्स से भी मदद ली जा रही है। एयरफोर्स और भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर लगातार आसमान में चक्कर लगाएंगे और इनमें भी NSG के कमांडो की तैनाती रहेगी। इसके अलावा ड्रोन की मदद से भी दिल्ली के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। हाई राइज इमारतों पर सेना के स्नाइपर तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा संदिग्ध लोगों पर नजर रखने के लिए AI मॉड्यूल की मदद ली जाएगी, जिससे किसी भी व्यक्ति की असामान्य हरकत का अलर्ट भेजेगा।

होटलों में तैनात होगी हाउस इंटरवेशन टीम

सूत्रों के मुताबिक, जिन होटलों में जी-20 के मेहमानों को ठहराया जाएगा, वहां हाउस इंटरवेंशन टीम की तैनाती की जाएगी। HIT दस्ते के जवान बंधक वाली स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से ट्रेंड होते हैं। इसके अलावा खतरा देखते ही इन्हें गोली मारने का आदेश प्राप्त होता है। ये जवान अर्बन वॉरफेयर यानी नजदीकी लड़ाई लड़ने के लिए ट्रेंड किए जाते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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