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अंतरिक्ष वैज्ञानिक और पूर्व ISRO प्रमुख कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का निधन, पहले रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट लॉन्चिंग में निभाई थी अहम भूमिका

25 अप्रैल, शुक्रवार को ISRO के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का निधन हो गया। करीब नौ सालों तक ISRO का अध्यक्ष रहने के बाद डॉ. कस्तूरीरंगन 2003 में रिटायर हुए थे। इसरो में अपने लगभग 40 साल के लंबे करियर के दौरान, वे कई महत्वपूर्ण मिशनों का हिस्सा रहे। इसरो के बयान के अनुसार डॉ. कस्तूरीरंगन का पार्थिव शरीर 27 अप्रैल को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट में रखा जाएगा।

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अंतरिक्ष वैज्ञानिक कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का निधन

Photo : ANI

Dr. Krishnaswamy Kasturirangan Death: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन का शुक्रवार 25 अप्रैल को बेंगलुरु में अपने आवास पर निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। ISRO के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। नौ साल से अधिक समय तक अध्यक्ष के रूप में ISRO को अपनी सेवाएं देने के बाद कस्तूरीरंगन 2003 में रिटायर हुए थे।

ISRO के अधिकारियों ने एक जारी बयान में कहा कि "आज सुबह बेंगलुरु स्थित उनके आवास पर सुबह 10:43 बजे उनका निधन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को 27 अप्रैल को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) में रखा जाएगा।"

Kasturirangan died

इसरो के एक कार्यक्रम के दौरान डॉ. कस्तूरीरंगन

पहले रिमोट सेंसिग सैटेलाइट के थे परियोजना निदेशक

1994-2003 के बीच इसरो के पांचवें अध्यक्ष के रूप में डॉ. कस्तूरीरंगन ने नौ वर्षों से अधिक समय तक अंतरिक्ष विभाग के सचिव का पद संभाला। इसरो में अपने लगभग 40 साल के लंबे करियर के दौरान, वे कई महत्वपूर्ण मिशनों का हिस्सा रहे। वो देश के पहले दो प्रायोगिक अर्थ ऑब्जरवेशन उपग्रहों, भास्कर-I और II के परियोजना निदेशक थे। भास्कर-I और II देश के पहले एक्सपेरिमेंटल रिमोट सेंसिग सैटेलाइट थे। जिसका इस्तेमाल हाइड्रोलॉजी और फॉरेस्ट्री (जल और जंगल के विज्ञान) में किया गया था।

रहे थे राज्यसभा सदस्य

पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. कस्तूरीरंगन ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से भौतिकी में ऑनर्स के साथ विज्ञान स्नातक और मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 1971 में अहमदाबाद के भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला में काम करते हुए प्रायोगिक उच्च ऊर्जा खगोल विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 2003 से 2009 तक राज्यसभा के सदस्य और भारत के तत्कालीन योजना आयोग के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।

Kasturirangan with dharmendra pradhan

शिक्षा मंत्री के साथ डॉ. कस्तूरीरंगन

NEP में भी निभाई थी भूमिका

ISRO के पूर्व प्रमुख महत्वाकांक्षी नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को तैयार करने वाली मसौदा समिति के अध्यक्ष भी थे।

NEP में सूचीबद्ध शिक्षा सुधारों के प्रणेता के रूप में जाने जाने वाले कस्तूरीरंगन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कर्नाटक नॉलेज कमीशन के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया था। कस्तूरीरंगन अप्रैल 2004 से 2009 तक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, बेंगलुरु के निदेशक भी रहे थे।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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