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फरीदाबाद टेरर मॉडयूल: आतंकी साजिश का पहला सुराग कश्मीर में जैश के पोस्टरों से मिला, यूं नाकाम हुए मंसूबे

अक्टूबर के मध्य में श्रीनगर के नौगाम में गुप्त रूप से लगाए गए जैश के पोस्टरों से मिला सुराग एक बहुत बड़ी साजिश का भंडाफोड़ करने में मददगार साबित हुआ। पोस्टर के जरिए टेरर मॉडयूल का खुलासा हुआ और अब तक नौ गिरफ्तारियां और 2,900 किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटक मिला है....

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दिल्ली धमाके से पहले आतंकी साजिश का पहला सुराग कश्मीर में मिला था

Faridabad Terror Plot: कश्मीरी डॉक्टरों से जुड़े जैश-ए-मुहम्मद के बहु-राज्यीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा जम्मू-कश्मीर पुलिस की लंबी जांच में हुआ, उसका सुराग जैश के पोस्टरों से हुआ। इसका पहला सुराग जिस तरह से मिला, उसका अंदाजा भी पुलिस को नहीं था कि इसके तार इतनी बड़ी साजिश से जुड़े मिलेंगे। अक्टूबर के मध्य में श्रीनगर के नौगाम में गुप्त रूप से लगाए गए जैश के पोस्टरों से मिला सुराग एक बहुत बड़ी साजिश का भंडाफोड़ करने में मददगार साबित हुआ। पोस्टर के जरिए टेरर मॉडयूल का खुलासा हुआ और अब तक नौ गिरफ्तारियां और 2,900 किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटक, बम बनाने की सामग्री और दो एके-सीरीज के हथियार बरामद हुए हैं।

जैश के पोस्टर से मिला सुराग

सुरक्षा बलों पर हमले की धमकी देने वाले जैश के पोस्टर जो 2019 तक आम थे, लेकिन अब दुर्लभ हैं। ऐसे ही कुछ पोस्टरों ने श्रीनगर के एसएसपी जी.वी. संदीप चक्रवर्ती की जिज्ञासा को बढ़ा दिया, जिन्होंने ऑपरेशन महादेव में जम्मू-कश्मीर पुलिस दल का नेतृत्व भी किया था। इस ऑपरेशन में पहलगाम आतंकही हमले के तीन हमलावरों को मार गिराया था। उन्होंने यह पता लगाने पर जोर दिया कि पोस्टर किसने लगाए थे। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से पत्थरबाजी के इतिहास वाले तीन ओवरग्राउंड वर्कर्स का पता चला।

भयावह साजिश का खुलासा

उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और पूछताछ के दौरान पुलिस शोपियां के एक मौलवी इरफान अहमद तक पहुंची। अगले 2-3 सप्ताह में इरफान से की जाने वाली पूछताछ से जैश की एक भयावह साजिश का खुलासा हुआ, जिसके तार जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से जुड़े मिले। अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों में फरीदाबाद के अल-फलाह विश्वविद्यालय में काम करने वाले कश्मीरी डॉक्टर, पुलवामा निवासी मुजम्मिल गनई, मूल रूप से काजीगुंड निवासी लेकिन सहारनपुर से पकड़ा गया अदील अहमद राठेर, और लखनऊ निवासी डॉ. शाहीन सईद शामिल है जो मुजम्मिल की कथित प्रेमिका है। हालांकि, पुलवामा निवासी डॉ. उमर अभी फरार है।

नौगाम पोस्टरों के पीछे तीन सक्रिय कार्यकर्ता भी हिरासत में हैं; मेवात के मौलवी हाफिज मोहम्मद इश्तियाक, जिसने फरीदाबाद में रसद का प्रबंध किया था; मौलवी इरफान और गंदेरबल निवासी उसका सहयोगी जमीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशा, जिसने जम्मू-कश्मीर पुलिस को मुजम्मिल तक पहुंचाया था। हालाकि मौलवी शुरू में बात नहीं कर रहा था, लेकिन उसके घर से बरामद एक मोबाइल डिवाइस पर पाकिस्तान स्थित जैश आतंकवादी उमर बिन खत्ताब द्वारा संचालित एक टेलीग्राम चैनल दिखा, जिससे पुष्टि हुई कि वह इरफान के संपर्क में था।

इरफान से पूछताछ में कई खुलासे

इरफान के एक आतंकी भर्ती मुतलाशा, पर भी एक अन्य आतंकी चैट ग्रुप फरजंदान-ए-दारुल उलूम देवबंद का हिस्सा होने का आरोप लगा था। इरफान ने आखिरकार बताया कि उसने एक डॉक्टर के घर में एके-47 देखी थी, जिसे उसने कट्टरपंथी बनाया था। मुतलाशा ने डॉक्टर की पहचान डॉ. मुजम्मिल गनई के रूप में होने की पुष्टि की। मुजम्मिल का पता हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में चला, जहां वह डॉ. अदील और डॉ. उमर के साथ काम कर रहा था।

दिल्ली थी निशाना

हालांकि यह पता लगाने के लिए पूछताछ जारी है कि फरीदाबाद में मिले विस्फोटकों का इस्तेमाल कैसे किया जाना था। जांचकर्ताओं को शक है कि यह अंदरूनी इलाकों में आतंकी हमले करने की साजिश थी, और फरीदाबाद से नजदीक होने के कारण दिल्ली एक स्पष्ट निशाना था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने जांच से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से बताया कि इसका मकसद शक से बचने के लिए खुद को मेडिकल प्रोफेशनल बताकर हमला करना था। विस्फोटकों और बम बनाने की अन्य सामग्रियों की भारी मात्रा को देखते हुए, ऐसा लगता है कि इन्हें दो सालों में इकट्ठा किया गया था।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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