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क्या है फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला? जो पहले मालेगांव, अब अमरावती में आया सामने; जानिए सारा मामला

Fake Nirth Certificate Scam: इन दिनों गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा गरमाया हुआ है। इसी बीच महाराष्ट्र से नए मामले सामने आ रहे हैं। ये मामला फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ा है। मालेगांव के बाद अमरावती में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला सामने आया है। जिसे लेकर भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने बड़ा दावा किया है।

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फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला।

Maharashtra News: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मालेगांव में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले की एसआईटी जांच के निर्देश दिए हैं। मालेगांव के बाद अब अमरावती में भी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घाटले की बात सामने आई है। इस पर पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने प्रतिक्रिया दी है।

अंजनगांव में बांग्लादेशी रोहिंग्या जन्म प्रमाण पत्र घोटाला

किरीट सोमैया ने गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया, "मालेगांव के बाद अमरावती के अंजनगांव में बांग्लादेशी रोहिंग्या जन्म प्रमाण पत्र घोटाला सामने आया है।" उन्होंने कहा कि अंजनगांव के तहसीलदार सुरजी ने मुझे बताया है कि पिछले 6 महीनों में बांग्लादेशी रोहिंग्याओं को 1100 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेज दिए गए हैं। यह सब बिना उचित जांच के प्रमाण पत्र जारी किए गए।

मालेगांव के करीब एक हजार लोगों के पास जन्म प्रमाणपत्र!

बता दें कि इससे पहले दो जनवरी को किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि मालेगांव के करीब एक हजार लोगों ने जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए खुद को बांग्लादेशी रोहिंग्या के रूप में गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने कहा था कि मुझे पता चला है कि एक घोटाला किया गया है, जिमसें मालेगांव के करीब एक हजार लोगों ने खुद को बांग्लादेशी रोहिंग्या के रूप में गलत तरीके से पेश किया, तहसीलदार से मुलाकात की और जन्म प्रमाणपत्र प्राप्त किया। अब नाशिक कलेक्टर और नासिक नगर निगम इस मामले की समीक्षा कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र एटीएस ने पूरे राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पिछले एक महीने में अवैध रूप से रह रहे 60 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे में सबसे ज्यादा बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया। पूरे महाराष्ट्र में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के खिलाफ एटीएस द्वारा ऑपरेशन चला कर कार्रवाई की जा रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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