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'मैं न राजा हूं, न किंगमेकर...', Ex गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी ने उत्तराखंड की बदलती तस्वीर पर की खुलकर बात

महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने खास बातचीत में कहा कि उत्तराखंड का निर्माण राज्य की मांग को लेकर हुआ था, न कि किसी विशेष राजधानी या किसी अन्य विषय के लिए।

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महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी

Photo : Times Now Digital

महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने खास बातचीत में उत्तराखंड के विकास, सामाजिक समस्याओं और राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात की।

टाइम्स नेटवर्क की वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रमा सोलंकी के साथ बातचीत में उत्तराखंड के 25 वर्षों के सफर से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है। 'राज्य तो मनुष्य से भी ज्यादा जीवंत है और राज्य की उम्र सैकड़ों-हजारों साल हो सकती है... और अभी बहुत कुछ होना बाकी है।

'राज्य की मांग को लेकर हुआ था उत्तराखंड का निर्माण'

वहीं, राजधानी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण राज्य की मांग को लेकर हुआ था, न कि किसी विशेष राजधानी या किसी अन्य विषय के लिए। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों ने राजधानी के नाम पर अपना बलिदान नहीं दिया था। उन्होंने आगे कहा, ''राज्य का संघर्ष इसलिए था कि हमारी अपनी राजधानी होनी चाहिए और वह पिछले 25 वर्षों से चल रही है जहां निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं।''

साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तराखंड को केवल राजधानी के विवाद तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आज उत्तराखंड केवल राजधानी के मुद्दों में नहीं उलझा है, बल्कि जीएसटी और जीडीपी जैसे आर्थिक मानकों में अग्रणी राज्यों में से एक है।

सड़क कनेक्टिविटी हुई बेहतर

इस दौरान, उन्होंने पुराने समय को याद किया कि कैसे पहले 2 दिन पैदल चलकर अपने क्षेत्र कपकोट जाना पड़ता था। अब वहां सड़कों और मोबाइल का जाल बिछ गया है। उन्होंने कहा कि PM मोदी की कृपा और मुख्यमंत्री धामी की कुशलता से हर जगह सड़क कनेक्टिविटी है। भगत सिंह कोश्यारी ने बातचीत में बेहतर कनेक्टिविटी को 'इंद्रलोक' जैसा बदलाव बताया।

बाघ और बंदरों का बढ़ा आतंक

वहीं, पहाड़ों में बढ़ते वन्यजीव संघर्ष पर भगत सिंह कोश्यारी ने 1980 के वन अधिनियम (Forest Act) की कठोरता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 1980 का वन अधिनियम इतना कठोर बन गया कि उसमें इंसान की कीमत कम और जंगल के पशुओं की कीमत अधिक हो गई। बकौल पूर्व राज्यपाल, हम "एक अति से दूसरी अति" पर चले गए हैं, जिसके कारण आज गांवों में बाघ और बंदरों का आतंक बढ़ गया है।

हालांकि, उन्होंने इस धारणा को नकार दिया कि जंगल कटने की वजह से जानवर नीचे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में विकास/सड़क के नाम पर हमने, जो पेड़ काटे हैं, उसके बावजूद अगर हम ठीक से देखेंगे तो उत्तरांखड के अंदर पहले की तुलना में जंगल बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि गांव नीचे की ओर आ रहे हैं और महिलाएं अब पहले की तरह घास या लकड़ी नहीं लाती हैं, इसलिए गांवों के आसपास झाड़ियां और जंगल बढ़ गए हैं... इस दौरान, उन्होंने सुझाव दिया कि गांवों में बाघ और बंदरों के आतंक को रोकने के लिए केंद्र के साथ मिलकर एक नई नीति बनाने की जरूरत है और मैं इसके लिए केंद्र से बात करूंगा।

भगत सिंह कोश्यारी ने सरकारी स्कूलों के बंद होने पर जताई चिंता

पूर्व राज्यपाल ने कहा कि मैंने समाचार पढ़ा कि उत्तराखंड में मनरेगा वाले काम करने वालों की संख्या 45 फीसदी रह गई है। इसका अर्थ क्या है कि जब से उत्तराखंड बना है, यहां नए उद्योग, नए काम खुल रहे हैं और लोग आत्मनिर्भर हो रहे हैं, जिससे उनके पास पैसा आ रहा है... इसी कारण अब लोगों में यह मानसिकता बन गई है कि प्राइवेट स्कूल में भेजने से बच्चे ज्यादा अच्छे होंगे और यह प्रवृत्ति केवल उत्तराखंड में नहीं, बल्कि पूरे देश में है।

'40 के 40 बच्चे सैनिक स्कूल की परीक्षा में हुए सफल'

सरकारी स्कूलों को मजबूत मॉडल में लाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, ''मैं लोगों को उदाहरण देता हूं। मेरा जो कपकोट ब्लॉक है, वहां के एक प्राइमरी स्कूल में 300 बच्चे पढ़ते हैं और हर बार 5-10 लड़के सैनिक स्कूल की परीक्षा में सफल होते हैं। पिछली बार तो पांचवीं के 40 के 40 बच्चे सैनिक स्कूल में भर्ती हुए। ऐसे और भी स्कूल हैं।'' बकौल भगत सिंह कोश्यारी, यदि शिक्षक निष्ठावान हो तो सरकारी स्कूल भी उत्कृष्ट परिणाम दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कई तकनीकी चीजें और ट्रेनिंग दी है, लेकिन सबसे अहम है शिक्षकों के भीतर राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदारी का भाव जागृत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल में छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है, लेकिन सरकारें अक्सर इस पर सख्ती नहीं कर पाती हैं, क्योंकि शिक्षक संगठन विरोध करने लगते हैं। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकों में यह भाव आरएसएस (RSS) की शाखा या स्वामी विवेकानंद के विचारों से जुड़ने पर आ सकता है, लेकिन यह महज नारों से तो होगा नहीं।

अंकिता भंडारी को कब मिलेगा न्याय?

अंकिता भंडारी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, ''आज के एआई (AI) के युग में कुछ भी छिपाना मुमकिन नहीं है और सरकार किसी को नहीं छिपा रही है। हम तो कहते हैं कि अगर कोई वरिष्ठ व्यक्ति भी शामिल हो, तो उसे भी दंड मिलना चाहिए। भाजपा और आरएसएस में गलत को गलत ही माना जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बहुत पारदर्शिता से काम किया है। मामले की सीबीआई जांच हुई और जो दोषी थे, उन्हें जेल भेजकर सजा दी गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में हमको सावधानी बरतनी चाहिए।

'निर्भया को बहुत देरी से न्याय मिला था' इस सवाल पर भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि अंकिता को निर्भया से पहले न्याय मिलेगा... एक युवा मुख्यमंत्री होने के नाते पुष्कर सिंह धामी ने सख्ती से कदम उठाए और मामले को खींचने के बजाय तेज़ी से अदालत के सामने रखा, जिससे दोषियों को बहुत जल्दी सजा हुई।

PM मोदी को लेकर क्या कुछ बोले कोश्यारी

इस दौरान, भगत सिंह कोश्यारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि धरती के कष्टों को देखा है और उन्हीं में से रास्ता बनाया है। उन्होंने कहा, ''पीएम मोदी बार-बार अगर किसी राज्य में जाते हैं तो वो उत्तरांखड है। देवभूमि में उन्होंने पैदल भ्रमक किया है... वह यहां के यथार्थ को जानते हैं।'' उन्होंने कहा कि आज के प्रधानमंत्री ने धरती के दुख, कष्ट देखें हैं और उनमें से रास्ता बनाया है। तो स्वाभाविक है कि धीरे-धीरे सब चीजें अच्छी हो जाएंगी।

किंगमेकर भूमिका को लेकर क्या कुछ बोले पूर्व राज्यपाल

भगत सिंह कोश्यारी ने किंगमेकर भूमिका से जुड़े सवाल पर कहा, ''वे स्वयं को न तो राजा मानते हैं और न ही किंगमेकर। राजाओं का जमाना अब खत्म हो चुका है। मैं कभी भी किंगमेकर की भूमिका में नहीं रहता है। मैं संघ के स्वयं सेवक के रूप में काम करता हूं।'' मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बारे में उन्होंने कहा कि वे युवा और ऊर्जावान हैं और उनके यूसीसी (UCC) लागू करने जैसे फैसलों की चर्चा अन्य राज्यों में भी होती है।

बातचीत के अंत में उन्होंने 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' की जगह 'आध्यात्मिक इंटेलिजेंस' (Spiritual Intelligence) पर ज़ोर दिया।

क्या उत्तराखंड में कभी कोई महिला CM होंगी

उत्तराखंड में महिला मुख्यमंत्री की संभावना पर उन्होंने कहा कि केवल पद पाना बड़ी बात नहीं है, बल्कि आम महिलाओं की भागीदारी और उनका स्तर ऊंचा होना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पुलिस भर्ती में 30 फीसदी आरक्षण जैसे कदमों से आने वाले समय में वास्तविक लैंगिक समानता आएगी। उन्होंने यह कहकर निष्कर्ष निकाला कि समाज में 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते' का भाव जागृत होना ही सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

Dr Rama Solanki
डॉ रमा सोलंकीauthor

डॉ. रमा सोलंकी टीवी और डिजिटल मीडिया में 17 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाली वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण भूमिकाओं में कार्य किया है। वह प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग और डिजिटल इनोवेशन के संयोजन के लिए जानी जाती हैं। वह एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट्री और ऑडियंस-सेंट्रिक कंटेंट के निर्माण में विशेष दक्षता रखती हैं। डॉ. सोलंकी शासन, जवाबदेही और जनहित से जुड़े राजनीतिक व खोजी कार्यक्रमों के निर्माण और एंकरिंग के लिए भी पहचान रखती हैं। आध्यात्मिक कंटेंट प्रोडक्शन में विशेषज्ञता रखते हुए उन्होंने लोकप्रिय टीवी और डिजिटल सीरीज का निर्माण व निर्देशन किया है, जिन्हें दर्शकों से व्यापक सराहना मिली। डिजिटल मीडिया में पीएचडी धारक डॉ. रमा सोलंकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कथाओं को आधुनिक प्रस्तुति और समकालीन संदर्भों से जोड़ने के लिए जानी जाती हैं।

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