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'सुशांत सिंह राजपूत को नहीं मिला न्याय', BJP विधायक ने उद्धव ठाकरे पर लगाए आरोप; कहा- मिटाए गए थे सबूत

भाजपा विधायक राम कदम ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि सुशांत सिंह राजपूत के घर से सबूत मिटाए गए थे। उद्धव ठाकरे की वजह से बॉलीवुड अभिनेता सुशांत को न्याय नहीं मिला। उन्होंने ये आरोप सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट के बाद लगाया है।

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भाजपा विधायक राम कदम ने ने उद्धव ठाकरे पर लगाए गंभीर आरोप।

Sushant Singh Rajput Death Case: बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत की मौत किसी भी तरह की साजिश या आपराधिक षड्यंत्र से नहीं हुई है। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर अब महाराष्ट्र से भाजपा विधायक राम कदम की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे ने पहले ही सीबीआई को केस दे दिया होता तो आज परिवार को न्याय मिल जाता।

'सुशांत सिंह राजपूत को उद्धव ठाकरे की वजह से नहीं मिला न्याय'

भाजपा विधायक राम कदम ने कहा, 'सुशांत सिंह राजपूत के केस को लेकर पूरे देश की एक ही मांग थी कि इसे सीबीआई को सौंपा जाए, मगर जानबूझकर लापरवाही बरती गई। बिहार की पुलिस जब इस मामले की जांच के लिए मुंबई आई तो उन्हें भी रोका गया। तत्कालीन उद्धव ठाकरे ने अपने लोगों को बचाने के लिए सारे सबूत मिटा दिए। इतना ही नहीं, घर का फर्नीचर हटाया गया और रंगाई-पुताई कर उसे घर के असली मालिक को सौंप दिया गया।'

उन्होंने आगे कहा, 'जब सारे सबूत मिटा दिए जाएंगे और उनके नेता रिया चक्रवर्ती के साथ प्रवक्ता बनकर खड़े रहेंगे तो सवाल उठना लाजिमी है। अगर उद्धव ठाकरे ने पहले ही सीबीआई को केस दे दिया होता तो आज सुशांत सिंह राजपूत के पिता को न्याय मिल गया होता। उन्हें न्याय नहीं मिल पाया तो इसके लिए तत्कालीन उद्धव ठाकरे जिम्मेदार हैं।'

दिशा सालियान के पिता की याचिका को हाईकोर्ट ने किया स्वीकार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की मौत और इस मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे की कथित संलिप्तता की नए सिरे से जांच की मांग की है।

सतीश सालियान ने अदालत में दावा किया कि उनकी बेटी की मौत 'आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या' थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में आदित्य ठाकरे और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की संलिप्तता को नजरअंदाज किया जा रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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