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कितनी महंगी होती है स्नेक बाइट? कब तक उतरता है इसका नशा, रेव पार्टी में कैसे शुरू हुआ यह कल्चर; जानें सबकुछ

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 4, 2023, 04:10 PM IST

Snake Bite in Rave Party: आम लोगों के लिए 'नशे के लिए स्नेक बाइट' चौंकाने वाला शब्द है। ऐसे में लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं। इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि नशे के लिए स्नेक बाइट क्या होती है? यह कैसे तैयार की जाती है? कितनी महंगी और कितनी खतरनाक होती है? आइए जानते हैं...

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Elvish Yadav Case

Photo : Twitter

Snake Bite in Rave Party: यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी के विनर एल्विश यादव पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर नोएडा की रेव पार्टियों में सांप का जहर सप्लाई करने और विदेशी लड़कियां उपलब्ध कराने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की एफआईआर में एल्विश समेत 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसमें कहा गया है कि एल्विश यादव बड़ी-बड़ी रेव पार्टियों में नशे के लिए स्नेक बाइट उपलब्ध कराते थे, इसके बदले वे मोटी रकम वसूल करते थे।

बता दें, भारत में इस तरह की रेव पार्टियों समेत नशे के लिए स्नेक बाइट पर भी प्रतिबंध है। ऐसे में एल्विश यादव नई मुसीबत में फंसते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, आम लोगों के लिए 'नशे के लिए स्नेक बाइट' चौंकाने वाला शब्द है। ऐसे में लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं।इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि नशे के लिए स्नेक बाइट क्या होती है? यह कैसे तैयार की जाती है? कितनी महंगी और कितनी खतरनाक होती है? आइए जानते हैं...

रेव पार्टी में स्नेक बाइट का कल्चर

भारत में रेव पार्टियों पर प्रतिबंध है। रेव पार्टियों का मतलब है कि ऐसी पार्टी जहां हर गैर कानूनी चीज का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता हो। अफीम, चरस, गांजा से लेकर महंगे से महंग ड्रग्स इन पार्टियों में यूज होते हैं। इतना ही नहीं नशे की हालत में सेक्स भी यहां बहुत आम है। इन रेव पार्टियों के चक्कर में कई बॉलीवुड सितारे भी जेल की हवा खा चुके हैं। पिछले साल शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान भी रेव पार्टी में ड्रग्स ले जाने के आरोप में फंसे थे। हालांकि, इन पार्टियों में स्नेक बाइट का कल्चर बहुत तेजी से जगह बना रहा है। जो लोग ड्रग्स के आदी हो चुके हैं और जिनको इसमें मजा नहीं आ रहा वे अब नशे के लिए स्नेक बाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

नशे के लिए कैसे इस्तेमाल होता है सांप का जहर

नशा करने के लिए लोग एक से एक जहरीले सांपों के जहर का इस्तेमाल करते हैं। इसमें कोबरा जैसे खतरनाक सांप भी शामिल हैं, जिनके काटने से पल भर में इंसान की मौत हो जाती है। दरअसल, सांपों को पहले एक तरह का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे इनके जहर का असर हल्का हो जाता है और यह जानलेवा भी नहीं रहता। इसके बाद लोग सांपों से खुद को कटवाते हैं। बताते हैं कि इंसान के शरीर में स्नेक बाइट का असर पांच से छह दिन तक रहता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल से इंसान की मौत तक हो सकती है।

काफी महंगी होती है स्नेक बाइट

जानकारी के मुताबिक, रेव पार्टियों में स्नेक बाइट काफी महंगी होती है। इसकी कीमत करोड़ों तक में होती है। इसमें सबसे महंगी कोबरा की बाइट होती है, जिसके 1 एमएल जहर की कीमत 10 से 25 हजार रुपये तक होती है। बड़ी-बड़ी रेव पार्टियों में एक्सपर्ट सपेरे होते हैं, जो स्नेक बाइट दिलवाते हैं और इसके लिए मोटी रकम वसूल करते हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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