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एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार दिल्ली में अमित शाह से करेंगे मुलाकात; किन मुद्दों पर होगी बात?

Maharashtra: महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? फिलहाल हर कोई इस सवाल के जवाब का इंतजार कर रहा है। इसी बीच ये जानकारी सामने आई है कि एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार दिल्ली में केंद्र गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। ये मीटिंग कई मायनों में अहम माना जा रहा है। आपको रिपोर्ट में समझाते हैं।

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अमित शाह से मिलेंगे शिंदे, फडणवीस और अजित पवार।

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में सरकार गठन की प्रक्रिया को कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के बीच बृहस्पतिवार रात दिल्ली में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक के बाद गति मिलने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि यह बैठक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि ऐसी खबरें आई हैं कि फडणवीस का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनना तय समझे जाने की धारणा के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व अपने कुछ मराठा नेताओं के नामों पर विचार कर रहा है।

कौन बनेगा महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री के चयन में जातिगत समीकरण की बड़ी भूमिका होने वाली है, क्योंकि सभी दलों के 288 विधायकों में से अधिकतर मराठा समुदाय से हैं। फडणवीस ब्राह्मण समुदाय से हैं और पहली बार 2014 में मुख्यमंत्री बने थे और फिर 2019 में कुछ समय के लिए फिर से मुख्यमंत्री बने। सूत्रों ने कहा, 'अगर आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) का हुक्म चलता है तो फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने की संभावना उज्ज्वल है।' शिवसेना नेताओं की शिंदे को मुख्यमंत्री का एक और कार्यकाल देने की जोरदार मांग के बीच, कार्यवाहक मुख्यमंत्री शिंदे ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से कहा है कि वह इस पद के लिए भाजपा की पसंद का पालन करेंगे।

डिप्टी सीएम नहीं बनेंगे एकनाथ शिंदे?

एकनाथ शिंदे के एक करीबी सहयोगी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री द्वारा नयी सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार करने की संभावना नहीं है। शिवसेना के विधायक और प्रवक्ता संजय शिरशाट ने हालांकि कहा कि शिंदे मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं। शिरसाट कहा, 'वह शायद उपमुख्यमंत्री नहीं बनना चाहेंगे। मुख्यमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति के लिए ऐसा करना सही नहीं है।' उन्होंने कहा कि शिवसेना किसी दूसरे नेता को उपमुख्यमंत्री बनाने के लिए कहेगी।

वहीं, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा है कि उन्हें अपने पिता एकनाथ शिंदे पर गर्व है, जिन्होंने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को दरकिनार करते हुए 'गठबंधन धर्म' का पालन करने का उदाहरण पेश किया है। सांसद ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उनके पिता का महाराष्ट्र के लोगों के साथ अटूट रिश्ता है। श्रीकांत शिंदे ने कहा, 'मुझे अपने पिता और शिवसेना प्रमुख पर गर्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर भरोसा बनाए रखा और अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को अलग रखते हुए गठबंधन धर्म का (बेहतरीन) उदाहरण पेश किया।'

महाराष्ट्र में किसे कितनी सीटों पर मिली है जीत?

भाजपा नीत महायुति गठबंधन ने हाल में हुए राज्य विधानसभा चुनावों में 288 सदस्यीय सदन में 230 सीट पर जीत दर्ज की तथा विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) को 46 सीट पर समेट दिया। भाजपा ने 132 सीट, शिवसेना ने 57 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने 41 सीट जीतीं। एमवीए में शामिल शिवसेना (यूबीटी) ने 20 सीट, कांग्रेस ने 16 और शरद पवार की राकांपा (एसपी) ने 10 सीट पर जीत दर्ज की।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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