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Earthquake: मोरक्को के बाद त्रिपुरा में भी भूकंप के झटके, 4.4 रही तीव्रता

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 9, 2023, 04:34 PM IST

Earthquake in Tripura: त्रिपुरा के धर्मनगर के 72 किमी उत्तर पूर्व में लोगों को भूकंप के झटके महसूस हुए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई। अभी तक भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।

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त्रिपुरा में भूकंप के झटके

Photo : ANI

Earthquake in Tripura: मोरक्को में शुक्रवार रात आए भयानक भूकंप के बाद शनिवार को भारत के त्रिपुरा में भी झटके महसूस किए गए हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, त्रिपुरा के धर्मनगर के 72 किमी उत्तर पूर्व में लोगों को भूकंप के झटके महसूस हुए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई।

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप के झटके दोपहर 3:48 बजे महसूस किए गए। अभी तक भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।

मोरक्को में भूकंप के कारण 600 से ज्यादा मौतें

मोरक्को में शुक्रवार देर रात आये भीषण भूकंप में 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 329 अन्य घायल हैं। ऐतिहासिक मराकेश शहर से लेकर एटलस पर्वत पर स्थित गांवों तक कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई देशों के नेताओं ने मोरक्को को मदद की पेशकश की है। मोरक्को के गृह मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि भूकंप के कारण कम से कम 632 लोगों की मौत हुई है। अधिकतर लोगों की मौत मराकेश और भूकंप के केंद्र के निकट स्थित पांच प्रांतों में हुई है। मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा 329 लोग घायल हैं। उसने बताया कि तलाश अभियान जारी है और बचावकर्मी दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका है।

6.8 तीव्रता का आया था भूकंप

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि रात 11 बजकर 11 मिनट पर आए भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 6.8 थी और भूकंप बाद के झटके कई सेकंड तक महसूस किये गए। अमेरिकी एजेंसी ने 19 मिनट बाद भी 4.9 तीव्रता का झटका महसूस किये जाने की सूचना दी। शुक्रवार को आए इस भूकंप का केंद्र मराकेश से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण में अल हौज प्रांत के इघिल शहर में था। यूएसजीएस ने बताया कि भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से 18 किलोमीटर की गहराई में था, जबकि मोरक्को की भूकंप निगरानी एजेंसी के मुताबिक, इसका केंद्र आठ किलोमीटर गहराई में था।

(भाषा इनपुट)

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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