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एकदम बनारसी खस्ता... दलित बूथ अध्यक्ष के घर नाश्ता करने के बाद बोले विदेश मंत्री जयशंकर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 11, 2023, 12:54 PM IST

G20 Summit: रविवार सुबह विदेश मंत्री एस जयशंकर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सुजाता के घर पहुंचे और बनारसी नाश्ता किया। इस दौरान उन्हें कुल्हड़ में पानी और सब्जियां परोसी गईं। इस दौरान सुजाता भी काफी खुश दिखाई दीं। उन्होंने बताया कि खाने और घर की साफ-सफाई के लिए हम लोग दो दिन से लगे हुए थे।

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दलित बूथ अध्यक्ष के घर नाश्ता करते विदेश मंत्री एस जयशंकर (स्क्रीन ग्रैब)

Photo : ANI

G20 Summit: विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों जी-20 सम्मेलन के तहत होने वाली बैठक की अध्यक्षता के लिए बनारस के दौरे पर हैं। इस बैठक में कई विदेशी मेहमानों के पहुंचने की भी संभावना है। बैठक में खाद्य सुरक्षा, अनाज व उर्वरक जैसे अहम विषयों पर चर्चा होनी है। हालांकि, इस बैठक से पहले विदेश मंत्री का एक दलित बूथ अध्यक्ष सुजाता के घर नाश्ता चर्चा का विषय बन गया है।

रविवार सुबह विदेश मंत्री एस जयशंकर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सुजाता के घर पहुंचे और बनारसी नाश्ता किया। इस दौरान उन्हें कुल्हड़ में पानी और सब्जियां परोसी गईं। इस दौरान सुजाता भी काफी खुश दिखाई दीं। उन्होंने बताया कि खाने और घर की साफ-सफाई के लिए हम लोग दो दिन से लगे हुए थे। हमें बहुत खुशी है कि इतने बड़े लोग हमारे घर आए।

जब विदेश मंत्री बोले- एकदम खस्ता

दलित बूथ अध्यक्ष के घर नाश्ता करने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान वह बहुत खुश दिखाई दिए। उन्होंने कहा, खाना बहुत स्वादिष्ट था...एकदम बनारसी खस्ता जैसा, जिसके बारे में बहुत सुना है। विदेश मंत्री ने कहा, आज से जी-20 का कार्यक्रम होगा। इसमें खाद्य सुरक्षा, मोटे अनाज, उर्वरक के बारे में चर्चा होगा। इस चर्चा में बहुत जरूरी है कि मोटे अनाज का मैसेज अच्छे तरीके से जाए।

सुजाता ने बनाई कचौड़ी और मकुनी

सुजाता ने बताया, हम लोग बहुत खुश हैं। मेहमानों के लिए हमने कचौड़ी, सत्तू भरकर मकुनी, दो तरह की सब्जी...जिसमें बैंगन आलू और परवल आलू बनाई। वहीं इस नाश्ते को थोड़ा देसी टच देने के लिए पानी और सब्जी कुल्हड़ में परोसी थी। इससे पहले शनिवार को वाराणसी पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि काशी तो बाबा की नगरी है। यहां आना सौभाग्य की बात है। यहां आकर मन गदगद हो गया। उन्होंने कहा, काशी का आतिथ्य दुनिया में सर्वमान्य है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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