देश

भारत ने बांग्लादेश को साफ-साफ शब्दों में समझा दिया; आतंकवाद को न बनाए सामान्य

India-Bangladesh : टेररिज्म के मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पड़ोसी देश बांग्लादेश को सख्त हिदायत दी है। विदेश मंत्रालय की ओर से ये जानकारी साझा की गई है कि भारत की तरफ से ये संदेश दिया गया है कि बांग्लादेश आतंकवाद को सामान्य न बनाए। आपको बताते हैं कि पूरा माजरा क्या है।

Image

आतंकवाद को सामान्य न बनाए बांग्लादेश, भारत की तरफ से दिया गया संदेश: विदेश मंत्रालय

Bangladesh on Terrorism: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन से दो टूक शब्दों में कहा था कि ढाका आतंकवाद को सामान्य न बनने दे। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह खुलासा किया। दोनों नेताओं की मुलाकात इस सप्ताह की शुरुआत में मस्कट में हुई थी।

विदेश मंत्रालय ने किया इस बात का खुलासा

बैठक के बाद जयशंकर कहा था कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार के साथ बातचीत द्विपक्षीय संबंधों और बिम्सटेक पर केंद्रित थी। वहीं बांग्लादेशी पक्ष ने कहा हुसैन ने सार्क स्थायी समिति की बैठक आयोजित करने के महत्व पर प्रकाश डाला और भारत सरकार से इस मामले पर विचार करने का आग्रह किया।

बता दें विदेश मंत्री ने 16 फरवरी को मस्कट में हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान बांग्लादेश सहित पड़ोसी देशों के अपने समकक्षों के साथ कई बैठकें की थीं।

'आतंकवाद को सामान्य न बनाए बांग्लादेश'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'इस बारे में कि क्या सार्क पर चर्चा हुई या नहीं... हां, यह मामला बांग्लादेश की ओर से उठाया गया था, जब विदेश मंत्री ने मस्कट में ढाका के विदेश सलाहकार से मुलाकात की थी। यह स्वीकार किया गया कि दक्षिण एशिया में हर कोई जानता है कि कौन सा देश और कौन सी गतिविधियां सार्क को बाधित करने के लिए जिम्मेदार हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह आतंकवाद को सामान्य न बनाए।'

मस्कट बैठक को लेकर बांग्लादेशी मीडिया के दावा किया कि चर्चा के दौरान प्रोफेसर यूनुस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित मुलाकात पर भी बात हुई। बांग्लादेशी मीडिया के मुातबिक बातचीत के दौरान अप्रैल में बैंकॉक में आयोजित होने वाले बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक बैठक आयोजित करने का विषय भी उठा।

बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल' (बिम्सटेक) का छठा शिखर सम्मेलन इस साल के अंत में 2-4 अप्रैल को थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित होने वाला है। बता दें बांग्लादेश शिखर सम्मेलन में बिम्सटेक के अगले अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालेगा।

मस्कट से पहले विदेश मंत्री जयशंकर और हुसैन की पिछली मुलाकात सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी। यह मुलाकात अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद से हटने के बाद भारत और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बीच पहली उच्च स्तरीय बातचीत थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article