Jaishankar meets Araghchi: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात और द्विपक्षीय बातचीत ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन से इतर हुई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट, उसके ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों पर विशेष रूप से चर्चा की। ईरान के विदेश मंत्री ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, 'आज सुबह दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ विस्तृत बातचीत हुई।’
उन्होंने कहा, 'पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके प्रभावों पर चर्चा की। साथ ही आपसी हितों से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।’ जयशंकर ने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में अराघची की भागीदारी की भी सराहना की।
ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों से मिले पीएम
इससे पहले पीएम मोदी ने बृहस्पतिवार को ब्रिक्स देशों के शीर्ष राजनयिकों से मुलाकात की। प्रधानमंत्री से संयुक्त रूप से मुलाकात करने वाले लोगों में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, ब्राजील के माउरो विएरा, इंडोनेशिया के सुगिओनो और दक्षिण अफ्रीका के रोनाल्ड लामोला शामिल थे। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया संकट विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति में उत्पन्न भारी व्यवधानों के कारण वैश्विक आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
ब्रिक्स में चार और देशों को शामिल किया गया
समूह की अध्यक्षता कर रहे भारत ने सितंबर में होने वाले ब्रिक्स वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी की। ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में इसका विस्तार कर इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया। वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का सदस्य बना।
पीएम से मिले लावरोव
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी को प्रधानमंत्री से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत पारस्परिक हित के विभिन्न क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान भारत के उस दृढ़ रुख को दोहराया कि संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का बेहतर मार्ग है।
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