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DRDO ने सुनाई खुशखबरी, टैंक उड़ाने वाली मिसाइल की हुई सफल टेस्टिंग; दुश्मनों के छूटेंगे पसीने! देखें VIDEO

भारत ने स्वदेशी तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट एंटी-टैंक मिसाइल MPATGM का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल चलते लक्ष्य पर टॉप अटैक तकनीक से सटीक वार करती है, जिससे भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता और मजबूत होगी। इस सफल परीक्षण से भारतीय सेना की ताकत और बढ़ेगी और देश को दुश्मन के आधुनिक टैंकों से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।

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डीआरडीओ ने स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल MPATGM का सफल परीक्षण किया।(फोटो सोर्स: ANI)

Photo : ANI

भारत ने अपनी नई और स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल MPATGM का सफल परीक्षण किया है। यह तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट मिसाइल है, यानी इसे दागने के बाद सैनिक को उसे कंट्रोल करने की जरूरत नहीं होती। परीक्षण के दौरान इस मिसाइल ने चलते हुए टैंक जैसे लक्ष्य को बिल्कुल सही तरीके से निशाना बनाया।

इस मिसाइल की खास बात यह है कि यह टॉप अटैक तकनीक से हमला करती है, यानी टैंक के ऊपर वाले हिस्से पर वार करती है, जो सबसे कमजोर होता है। इस सफल परीक्षण से भारतीय सेना की ताकत और बढ़ेगी और देश को दुश्मन के आधुनिक टैंकों से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी।

देखें हैरतअंगेज वीडियो

11 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित KK Ranges में MPATGM (Man Portable Anti-Tank Guided Missile) का सफल परीक्षण किया है. PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल ने एक चलते हुए टारगेट पर सटीक निशाना साधा। DRDO द्वारा जारी किए गए वीडियो में देखा जा सकता कि मिसाइल ने जैसे ही टारगेट को हिट किया, उसके परखच्चे उड़ गए।

क्या है मिसाइल की खासियत?

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'Top Attack' क्षमता है. अक्सर टैंकों का सामने का हिस्सा बहुत मजबूत होता है, लेकिन उनका ऊपरी हिस्सा कमजोर होता है। यह मिसाइल हवा में ऊपर जाकर सीधे टैंक की छत पर हमला करती है, जिससे दुनिया का सबसे मजबूत टैंक भी बच नहीं सकता।

इपरसोनिक मिसाइल बनाने की दिशा में मिली सफलता

हाल ही में भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की दिशा में अहम सफलता हासिल की है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट संगठन के तहत काम करने वाली हैदराबाद की लैबोरेटरी ने एक अहम टेस्ट को पूरा किया है। इससे भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की राह की सबसे बड़ी बाधा को पार कर लिया है। रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा कि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डीआरडीएल, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट संगठन की हैदराबाद स्थित लेबोरेटरी है। DRDL ने 9 जनवरी 2026 को अपनी अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (SCPT) फैसिलिटी में अपने एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट फुल स्केल कंबस्टर का एक लंबा ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया। इसमें 12 मिनट से अधिक का रन टाइम हासिल किया गया।

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Piyush Kumar
Piyush Kumar author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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