पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव डॉ. मोहसिन रेजाई ने सोमवार शाम भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ भारत और ईरान के आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर वार्ता हुई। भारत में ईरान के दूतावास ने इस बारे में जानकारी दी।
बता दें कि यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत के सामने ईरान और खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। भारत लगातार संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील करता रहा है। साथ ही, भारत ने व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों का विरोध किया है।
रियाद एयरपोर्ट पर हमले के बाद बढ़ी चिंता
ईरान के सुरक्षा प्रमुख और भारत के NSA के बीच यह बातचीत सऊदी अरब की राजधानी रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले के दो दिन बाद हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हुए। हमले के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार बताया गया है।
मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से की थी बातचीत
पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की थी। इस दौरान मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया था। उन्होंने समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने और नाविकों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता भी जताई थी।
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया था कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत की यह स्थिति क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने की उसकी प्राथमिकताओं को दर्शाती है।
ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन की चुनौती
भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब समेत खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक हित जुड़े हैं। इन देशों को ईरानी सैन्य हमलों का सामना करना पड़ा है। इनमें से कुछ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं। ऐसे में भारत के लिए दोनों पक्षों के साथ अपने संबंध बनाए रखना और क्षेत्रीय संघर्ष पर स्पष्ट कूटनीतिक रुख अपनाना महत्वपूर्ण है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यापारिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों के हताहत होने की घटनाओं ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है।
