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इंडियन नेवी को मिला पहला स्वदेशी गोताखोरी सहायता पोत Nistar, अब गहरे समुद्र में भी चलाया जा सकेगा रेस्क्यू अभियान; जानें क्या है खासियत

Diving Support Vessel Nistar: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना को पहला स्वदेश निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल निस्तार सौंपा गया। 118 मीटर लंबाई और लगभग 10000 टन भार वाला यह जहाज अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है और 300 मीटर की गहराई तक जटिल डीप सी सैचुरेशन डाइविंग और बचाव अभियान चलाने में सक्षम है। यह क्षमता दुनिया भर की चुनिंदा नौसेनाओं के पास है।

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प्रथम स्वदेशी गोताखोरी सहायता पोत ‘निस्तार' भारतीय नौसेना को सौंपा गया

Photo : Twitter

Diving Support Vessel Nistar: प्रथम स्वदेशी गोताखोरी सहायता पोत ‘निस्तार’ भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह पोत अत्यधिक विशिष्ट है और गहरे समुद्र में गोताखोरी तथा बचाव अभियान चला सकता है। उन्होंने बताया कि यह पोत गहरे पानी में बचाव कार्य करने वाली पनडुब्बी (डीएसआरवी) के लिए ‘मदर शिप’ यानी मुख्य जहाज के रूप में भी काम करेगा ताकि पनडुब्बी से किसी आपात स्थिति में कर्मियों को बचाने और निकालने में मदद मिल सके। नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि निस्तार पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित गोताखोरी सहायता पोत है। इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने आठ जुलाई को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना को सौंपा।

300 मीटर गहराई तक कर सकता है गोताखोरी

नौसेना ने बताया कि यह एक खास तरह का पोत है और गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव अभियान चला सकता है। उनके अनुसार, ऐसी क्षमता दुनिया की कुछ ही नौसेनाओं के पास होती है। उन्होंने कहा कि इस युद्धपोत को भारतीय नौवहन रजिस्टर (आईआरएस) के नियमों के अनुसार निर्मित किया गया है। ‘निस्तार’ नाम संस्कृत शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ मुक्ति या बचाव होता है। प्रवक्ता ने कहा कि 118 मीटर लंबे और लगभग 10000 टन वजनी इस पोत में गोताखोरी के अत्याधुनिक उपकरण लगे हुए हैं और यह 300 मीटर गहराई तक गहरे समुद्र में गोताखोरी करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह पोत गोताखोरों की निगरानी और 1000 मीटर गहराई तक बचाव कार्यों के लिए दूर से नियंत्रित वाहन (रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स) से लैस है। प्रवक्ता ने कहा कि लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ ‘निस्तार’ की सुपुर्दगी, स्वदेशी निर्माण के लिए भारतीय नौसेना की खोज में एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है और यह भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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