मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 11 सितंबर यानी शुक्रवार को दतिया पहुंचे। यहां उन्होंने वर्तमान विधायक घनश्याम सिंह के निवास पर मुलाकात की और सहभोज में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या राम मंदिर तक पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी यह यात्रा सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप और सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से होगी।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म इंसानियत का संदेश देता है। इसमें कोई छोटा-बड़ा या जात-पात नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के ग्रंथों में सद्भाव और मानवता का संदेश मिलता है, नफरत का नहीं।
'व्यक्ति की पहचान जन्म से नहीं, बल्कि कर्म से होनी चाहिए'
उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्ति की पहचान जन्म से नहीं, बल्कि कर्म से होनी चाहिए। कोई व्यक्ति किस जाति में पैदा हुआ, इसमें उसका कोई दोष नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ण व्यवस्था को भी कर्म के आधार पर देखा जाना चाहिए। दिग्विजय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर रामनाथ झा का हवाला देते हुए मनुस्मृति और वर्ण व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी।
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'वेदों और ग्रंथों में जात-पात के आधार पर विभाजन का समर्थन नहीं'
उन्होंने सवाल किया कि यदि बाबा साहब आंबेडकर को उनके जन्म के आधार पर देखा जाए तो उन्हें शूद्र मानेंगे या ब्राह्मण? उन्होंने कहा कि बाबा साहब से बड़ा ज्ञाता कोई नहीं था। उनके मुताबिक वेदों और ग्रंथों में जात-पात के आधार पर विभाजन का समर्थन नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान राजनीति में धर्म के नाम पर नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है, जिसे खत्म करने और लोगों को जागरूक करने के लिए वे यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान भ्रष्टाचार करने वालों का भी खुलासा किया जाएगा।
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मां पीतांबरा के दर्शन किए
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने मां पीतांबरा के दर्शन किए और उन्हें पदयात्रा के लिए प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा-धर्म जोड़ता है, जबकि राजनीति तोड़ती है। इससे पूर्व दिग्विजय सिंह ने दतिया शक्ति पीठ पीताम्बरा मंदिर पर पूजा अर्चना की एवं मां पीताम्बरा एवं वनखण्डेश्वर महादेव का आर्शीवाद लिया।
