इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मथुरा में 'शाही ईदगाह' की जगह 'विवादित ढांचा' शब्द के इस्तेमाल के लिए निर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।मूल वाद के साथ अन्य संबंधित मामलों में आगे की सुनवाई के दौरान 'शाही ईदगाह' की जगह 'विवादित ढांचा' शब्द के इस्तेमाल के लिए संबंधित स्टेनोग्राफर को निर्देश जारी करने का अनुरोध करते हुए एक आवेदन ए-44 दाखिल किया गया था।
इस आवेदन के पक्ष में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा हलफनामा दाखिल किया गया था। वहीं दूसरी ओर, प्रतिवादियों की तरफ से लिखित आपत्ति दाखिल की गई थी।
मंदिर बहाल करने के लिए 18 मुकदमे दाखिल
न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा ने शुक्रवार को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मूल मुकदमों की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।उल्लेखनीय है कि हिंदू पक्ष ने शाही ईदगाह ढांचा हटाने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बाद जमीन का कब्जा लेने और वहां मंदिर बहाल करने के लिए 18 मुकदमे दाखिल किए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ये मुकदमे समय सीमा, वक्फ अधिनियम और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से बाधित नहीं हैं। पूजा स्थल अधिनियम 15 अगस्त, 1947 को मौजूद किसी भी धार्मिक ढांचे की स्थिति को परिवर्तित करने से रोकता है।
मुस्लिम पक्ष की अर्जी खारिज कर दी थी
अदालत ने 23 अक्टूबर, 2024 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में 11 जनवरी, 2024 के आदेश को वापस लेने की मुस्लिम पक्ष की अर्जी खारिज कर दी थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी, 2024 के अपने निर्णय में हिंदू पक्षों की ओर से दायर सभी मुकदमों को समेकित कर दिया था।
विवाद औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है
यह विवाद मथुरा में मुगल सम्राट औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है जिसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म स्थान पर एक मंदिर को कथित तौर पर ध्वस्त करने के बाद बनाया गया है।
