Delhi Cyber Fraud Gang Bust: दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों को वित्तीय ऑक्सीजन देने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह देश भर के साइबर ठगों को फर्जी और 'म्यूल' बैंक खाते (Mule Accounts) मुहैया कराता था, जिनका इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट', जॉब फ्रॉड और नकली निवेश योजनाओं से ठगा गया पैसा ठिकाने लगाने में होता था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मध्य दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में स्थित एक होटल में छापेमारी कर गिरोह के चार मुख्य सदस्यों को दबोच लिया है।
गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल
मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) रोहित राजबीर सिंह ने सोमवार को मामले की जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान व्यवस्थित नेटवर्क के रूप में हुई है:
संजय (30 वर्ष) – निवासी: दिल्ली (स्थानीय संचालक)
कुलदीप गोले (32 वर्ष) – निवासी: दिल्ली (स्थानीय संचालक)
निर्दोष बिड़लान (24 वर्ष) – निवासी: सोनीपत, हरियाणा
दीपक बिश्नोई (20 वर्ष) – निवासी: हनुमानगढ़, राजस्थान
किराए के फर्जी एग्रीमेंट और 8% कमीशन का खेल
पूछताछ में इस सिंडिकेट के काम करने के बेहद चौंकाने वाले और कॉर्पोरेट जैसे तौर-तरीके (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है:
फर्जी कंपनियां और चालू खाते: गिरोह के बाहरी संचालक किराए के जाली समझौतों (Fake Rent Agreements) का इस्तेमाल करके फर्जी पार्टनरशिप फर्में और कंपनियां रजिस्टर्ड कराते थे। इसके बाद इन फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंकों में कमर्शियल चालू खाते (Commercial Current Accounts) खुलवाए जाते थे।
बैंकिंग किट की डिलीवरी: इन खातों की चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड जैसी पूरी बैंकिंग किट दिल्ली भेजी जाती थी, जहां स्थानीय संचालक इसे संभालते थे।
कमीशन का गणित: इस अवैध काम के लिए मूल खाताधारक को लगभग 8 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था, जबकि बीच के बिचौलियों को 2 से 4 प्रतिशत का अतिरिक्त कमीशन मिलता था।
काले धन को सफेद दिखाना: साइबर ठगों द्वारा लूटा गया पैसा इन खातों में मंगाया जाता था। इसके बाद 'पॉइंट-ऑफ-सेल' (POS) मशीनों और मर्चेंट UPI QR कोड का इस्तेमाल कर उस अवैध रकम को वैध व्यावसायिक लेन-देन (Legal Business Transactions) के रूप में दिखाकर आगे ट्रांसफर कर दिया जाता था।
बरामदगी और राष्ट्रीय स्तर पर फैला जाल
पुलिस ने पहाड़गंज के होटल में की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज और तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं:
-1 चालू बैंक POS मशीन और मर्चेंट UPI QR कोड स्कैनर।
-कमर्शियल चालू खातों से जुड़ी 5 चेकबुक और पासबुक।
-6 एक्टिव डेबिट कार्ड और 4 मोबाइल फोन (जिनमें बैंकिंग लेन-देन के कई रिकॉर्ड मौजूद हैं)।
-3 मूल पार्टनरशिप एग्रीमेंट, कॉर्पोरेट स्टैम्प और पैन कार्ड (PAN Card)।
NCRP पोर्टल से खुले राज
डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि जब्त किए गए बैंक खातों और मोबाइल फोनों के तकनीकी विश्लेषण से पता चला है कि ये खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज धोखाधड़ी की कई बड़ी शिकायतों से जुड़े हुए हैं। इस नेटवर्क के तार मुख्य रूप से कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के साइबर अपराधों से सीधे जुड़े पाए गए हैं। वहीं, पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और इस नेटवर्क के मुख्य मास्टरमाइंड्स की तलाश में छापेमारी जारी है।
