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राजस्थान सरकार को बड़ी राहत, दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस की कुर्की पर सशर्त रोक

Bikaner House Attachment Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस की कुर्की पर सशर्त रोक लगा दी है, साथ ही अदालत ने एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।

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बीकानेर हाउस की कुर्की पर सशर्त रोक।

Bikaner House Attachment Case: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने राजस्थान सरकार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस की कुर्की पर सशर्त रोक लगा दी है, साथ ही अदालत ने एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 7 जनवरी, 2025 को होगी, तब तक कुर्की के आदेश पर रोक रहेगी।

कुर्की आदेश पर रोक से राजस्थान सरकार को महत्वपूर्ण राहत मिली है। इस आदेश के बाद ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण बीकानेर हाउस राज्य सरकार के नियंत्रण में ही रहेगा, जिससे सरकारी कार्यों में कोई बाधा नहीं आएगी। अदालत ने कहा है कि नोखा नगर पालिका अगले आदेश तक बीकानेर हाउस को लेकर कोई फैसला या काम नहीं कर पाएगी।

क्या है मामला?

बता दें, राजस्थान की नोखा नगर पालिका और एनवायरो इन्फ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच विवाद के बाद एक समझौता हुआ था। समझौते का पालन नहीं करने पर पाटियाला हाउस कोर्ट की कमर्शियल कोर्ट ने बीकानेर हाउस को कुर्क करने आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत एनवायरो इन्फ्रा इंजीनियर्स के बीच विवाद के बाद नगर पालिका को 50.31 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।

(इनपुट - गौरव श्रीवास्तव)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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