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Namo Bharat Trains: वंदे भारत ट्रेन के बाद अब देश को मिलेगी 'नमो भारत', रैपिड रेल को मिला नया नाम

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 19, 2023, 07:17 PM IST

RRTS Trains: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (20 अक्टूबर) को रीजनल रैपिड ट्रांजिड सिस्टम (RRTS) ट्रेन का उद्धाटन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इन ट्रेनों को नए नाम 'नमो भारत' से जाना जाएगा।

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नमो भारत के नाम से जानी जाएगी रैपिड रेल

Photo : ANI

RRTS Trains: वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के बाद अब देश को 'नमो भारत' ट्रेन मिलने जा रही है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (20 अक्टूबर) को रीजनल रैपिड ट्रांजिड सिस्टम (RRTS) का उद्धाटन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इन ट्रेनों को नए नाम 'नमो भारत' से जाना जाएगा।

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश के पहले रीजनल रैपिड ट्रांजिड सिस्टम को उद्धाटन करेंगे। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के 17 किलोमीटर लंबे प्राथमिकता खंड को उद्घाटन के एक दिन बाद यानी 21 अक्टूबर को यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी साहिबाबाद और दुहाई डिपो को जोड़ने वाले एक रैपिडएक्स ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।

17 किलोमीटर के कॉरिडोर में पांच स्टेशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस 17 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे उसमें पांच स्टेशन होंगे। इस खंड में साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो स्टेशन होंगे। इस सेमी हाईस्पीड ट्रेन में साहिबाबाद से दुहाई डिपो स्टेशन तक सफर करने के लिए यात्रियों को 50 रुपये खर्च करने होंगे। हालांकि, न्यूनतम किराया 20 रुपये रखा गया है।

180 किमी/घंटा होगी अधिकतम स्पीड

जानकारी के मुताबिक, आरआरटीएस सेमी हाई स्पीड और हाई फ्रीक्वेंसी कम्प्यूटर ट्रांजिट सिस्टम है। यह ट्रेन अधिकतम 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी। पीएमओ की ओर से जारी बयान के मुताबिक, आरआरटीएस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इंटरसिटी आवागमन के लिए यात्रियों को हर 15 मिनट में हाई स्पीड ट्रेनें उपलब्ध होंगी। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर को 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा लागत से विकसित किया जा रहा है। इस ट्रेन से यात्रियों को दिल्ली से मेरठ जाने में एक घंटे से भी कम समय लगेगा।

प्रीमियम कोच का सफर होगा महंगा

इस ट्रेन में दो तरह के कोच होंगे। स्टैंडर्ड कोच का न्यूनतम किराया 20 रुपये रखा गया है। यानी इस कोच से गाजियाबाद से गुलधर और दुहाई तक का सफर 20 रुपये में किया जा सकता है। वहीं साहिबबाद से गाजियाबाद स्टेशन तक 30 रुपये किराया होगा। वहीं प्रीमियम कोच का सफर महंगा होगा। साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक जाने के लिए यात्रियों को 100 रुपये किराया देना होगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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