Delhi liquor Scam Case: दिल्ली शराब घोटाला मामले में केजरीवाल के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेने के मामले में अहम अपडेट आया है। हाईकोर्ट ने केजरीवाल का हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया। जज को सुनवाई से अलग करने की मांग वाली केजरीवाल की अर्जी पर हाई कोर्ट शाम 4.30 बजे.फैसला सुनाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केजरीवाल ने बहस में भाग लिया। केजरीवाल ने कहा अगर हमारे रिजॉइंडर को रिकॉर्ड पर नहीं लिया जाएगा तो यह मिसकैरिएज ऑफ जस्टिस (miscarriage of justice) होगा।
जस्टिस स्वर्ण कांता ने क्या-क्या कहा?
जस्टिस स्वर्ण कांता ने कहा कि आपको ये तो बोलना ही नहीं चाहिए। आउट ऑफ द वे जाकर आपका अतिरिक्त हलफनामा ऑन रिकॉर्ड लिया गया। क्योंकि आप बहस खुद कर रहे थे, रजिस्ट्री का एक नियम जो सबके लिए फाइल हो रहा है। यह कोई असाधारण मामला नहीं है।
जस्टिस सवर्ण कांता ने कहा यह एक साधारण केस है जैसा बाकी लोगों का होता है। मैंने ऑर्डर रिजर्व करने के बाद रिकॉर्ड पर अतिरिक्त हलफनामा लिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की मांग का विरोध करते हुए कहा कि लिखित दलील का कोई जवाब नहीं होता है। आप लिखित सबमिशन फाइल डाउनलोड करें। उसका समय दिया गया वो आपने नहीं किया।
जानें पूरा मामला
बता दें कि दिल्ली शराब नीति घोटाले की सुनवाई किसी और जज से करवाने की मांग वाली केजरीवाल के हलफनामे पर सीबीआई ने आपत्ति जताई थी। सीबीआई ने कहा कि 14.04.2026 का हलफनामा देर से और सुनवाई पूरी होने के बाद दाखिल किया गया है। इसके अलावा, यह हलफनामा केजरीवाल ने बाद में सोची समझी रणनीति के तहत फाइल किया है, जिसका उद्देश्य न्यायालय और व्यक्तियों को बदनाम करना है। साथ ही सीबीआई ने यह भी दलील दी है कि जब सभी पक्षों की बहस पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित हो चुका था,तब ऐसा हलफनामा दाखिल करना प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
केजरीवाल को पहले से जानकारी होने का दावा
सीबीआई ने अपनी दलीलों में यह भी कहा है कि केजरीवाल को हलफनामे में बताए गए तथ्यों की जानकारी पहले से ही थी। यही वजह है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से जुड़ी जानकारी को लेकर सूचना का अधिकार का उपयोग भी उनके निर्देश पर किया गया। सीबीआई ने आपत्ति उठाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान उन्होंने यह मुद्दे नहीं उठाए, जिससे उनकी मंशा संदिग्ध प्रतीत होती है।
सुनवाई की टाइमलाइन को लेकर उठाए गए प्रश्न
सीबीआई ने दलील दी कि 13 अप्रैल को ही कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसी दिन सुनवाई पूरी होगी। केजरीवाल ने अपनी दलीलें पूरी कर कोर्ट से चले गए,यह जानते हुए कि मामला समाप्त हो चुका है। इसके बाद हलफनामा दाखिल करना जबरदस्ती की कोशिश है।
जज हटाने की मांग पर सीबीआई की आपत्तियां
सीबीआई ने कहा कि यदि जज हटाने के लिए ऐसे आधार स्वीकार किए गए,तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। अगर ऐसा हुआ तो किसी भी जज के रिश्तेदार सरकारी पैनल में होने पर वह जज केस नहीं सुन पाएंगे। यही नहीं जिन जजों ने पहले किसी मामले में प्रारंभिक राय दी हो, वे आगे सुनवाई नहीं कर सकेंगे।ऐसे में केवल अनुमानित पक्षपात के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो जाएगी।इससे पूरे न्यायिक तंत्र में अराजक स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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