प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 8 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने एक विस्तृत लेख लिखकर भारतीय राजनीति, बीजेपी के संगठनात्मक विस्तार, राम मंदिर आंदोलन और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में आडवाणी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने पार्टी के लिए कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियां तैयार कीं और उसे 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत पर आधारित स्पष्ट वैचारिक आधार दिया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना लेख साझा करते हुए आडवाणी के जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं का जिक्र किया। उन्होंने उनके संघर्ष, राजनीतिक विचारधारा, संगठनात्मक क्षमता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनके लंबे राजनीतिक संबंधों को भी याद किया।
बंटवारे का दर्द झेलकर दोबारा खड़ी की जिंदगी
पीएम मोदी ने लिखा कि लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को हुआ था। 1947 में भारत के विभाजन के दौरान उन्हें सिंध में अपना परिचित संसार छोड़ना पड़ा। एक युवा के रूप में उन्होंने विभाजन का दर्द झेला, लेकिन बिना किसी कटुता के अपनी जिंदगी को नए सिरे से खड़ा किया। मोदी के मुताबिक, विपरीत परिस्थितियों में शून्य से शुरुआत करने और संघर्षों के बावजूद आगे बढ़ने का यही गुण आडवाणी के पूरे राजनीतिक जीवन में दिखाई दिया। उन्होंने पहले भारतीय जनसंघ को मजबूत करने और बाद में भारतीय जनता पार्टी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में आडवाणी के कार्यकाल में पार्टी ने बड़ी राजनीतिक उपलब्धियां हासिल कीं। उनके लेख के मुताबिक, 1989 में कांग्रेस की सीटें 400 से घटकर 200 से नीचे आ गईं और 1996 में बीजेपी पहली बार लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। मोदी ने कहा कि आडवाणी ने कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया और पार्टी को राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर आधारित मजबूत आधार दिया।
वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता ने बनाई अलग पहचान
प्रधानमंत्री ने आडवाणी के व्यक्तित्व की दो विशेषताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। पहली उनकी वैचारिक स्पष्टता और दूसरी उनकी बौद्धिक तीक्ष्णता। मोदी ने लिखा कि आडवाणी के भाषणों और लेखन में ये दोनों गुण साफ दिखाई देते थे। भारतीय जनसंघ और बीजेपी के लिए उनके द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव आज भी पढ़ने योग्य हैं। उनके साक्षात्कार भी हमेशा स्पष्ट और सटीक होते थे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आडवाणी ने भारतीय राजनीति में लंबे समय तक प्रचलित छद्म धर्मनिरपेक्षता को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई।
