China Gold Buying News : दुनिया भर के बाजारों में जब सोने की कीमतें गिर रही थीं, तब चीन की केंद्रीय बैंक (पीपुल्स बैंक ऑफ चीन - PBOC) ने इसे एक बेहतरीन मौके की तरह इस्तेमाल किया। चीन ने अक्टूबर महीने में अपने सोने के भंडार में करीब 25.8 मीट्रिक टन (8,30,000 औंस) सोना और जोड़ लिया है। इसके साथ ही चीन की केंद्रीय बैंक द्वारा लगातार सोना खरीदने का यह सिलसिला पूरे दो साल यानी 24 महीने लंबा हो गया है।
मंदी के बाजार में चीन बना सबसे बड़ा खरीदार
बाजार में सुस्ती और गिरावट के माहौल के बावजूद चीन ने अपनी रणनीति नहीं बदली और लगातार सोना खरीदता रहा। इस साल के शुरुआती 10 महीनों में चीन अब तक करीब 129 मीट्रिक टन सोना अपने खजाने में जोड़ चुका है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के दौरान दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में चीन का पीपुल्स बैंक सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा।
जुलाई से सितंबर के बीच दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल मिलाकर 321 टन सोना खरीदा, जो 2024 की आखिरी तिमाही के बाद से किसी भी तिमाही में की गई सबसे बड़ी खरीदारी है। जब आम निवेशक सोना बेचने या दूर रहने की सोच रहे थे, तब केंद्रीय बैंकों की इस भारी खरीदारी ने सोने की गिरती कीमतों को सहारा देने का काम किया।
आम जनता पर केंद्रीय बैंक का प्रभाव
चीन की केंद्रीय बैंक की इस लगातार खरीदारी का असर वहां के आम नागरिकों पर भी साफ देखने को मिल रहा है। चीन के आम परिवारों ने बैंक के इस कदम से संकेत लिया और अक्टूबर में जब सोना करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचा, तो जमकर खरीदारी की। आम चीनी निवेशकों का मानना है कि भले ही अभी बाजार में उतार-चढ़ाव हो, लेकिन अगर देश का केंद्रीय बैंक इतनी बड़ी मात्रा में सोना जमा कर रहा है, तो लंबे समय में सोने की कीमतें सुरक्षित रहेंगी और इनमें सुधार होगा। चीन की यह रणनीति साफ दर्शाती है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सोने को सबसे भरोसेमंद जरिया मानता है।
कीमतों में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
अक्टूबर के महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में करीब 7% की भारी गिरावट देखी गई, जिससे सोना घटकर 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम सपोर्ट स्तर से भी नीचे चला गया। सोने के लिए अक्टूबर का यह महीना 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद का सबसे खराब अक्टूबर साबित हुआ, जब कीमतें अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। सोने के दाम गिरने के पीछे मुख्य वजह वैश्विक तनाव और महंगाई रही। इस साल फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में 20% से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
युद्ध के कारण कच्चे तेल और ऊर्जा के दाम बढ़े, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ी। महंगाई पर काबू पाने के लिए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट की तरफ निवेशकों का आकर्षण कम हो जाता है, जिससे सोने पर दबाव बनता है। हालांकि, हाल ही में हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद सोने की कीमतों में थोड़ी रिकवरी जरूर देखने को मिली है।
