Arvind Kejriwal Manish Sisodia HC: आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से आबकारी नीति मामले में उन्हें आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका को खारिज करने की अपील की। आप नेताओं कहा कि यह याचिका 'अभूतपूर्व जल्दबाजी' और 'बेहद गैर-गंभीर तरीके' से दायर की गई थी।
अलग-अलग अर्जियों में, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व उप मुख्यमंत्री ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की पुनरीक्षण याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए और कहा कि वे इस 'अधूरी' और 'अस्पष्ट' याचिका में उनके खिलाफ एजेंसी का मामला समझ नहीं पाए हैं।
'CBI ने चार घंटे के भीतर ही दायर कर दी जल्दबाजी भरी याचिका'
याचिका में कहा गया, 'सीबीआई ने यह पुनरीक्षण याचिका बहुत ज्यादा जल्दबाजी में और बिना गंभीरता के दायर की है। यह याचिका विशेष न्यायाधीश के आरोप मुक्त करने के आदेश के सिर्फ चार घंटे के भीतर ही दायर कर दी गई थी। इससे साफ पता चलता है कि सीबीआई ने 500 से ज्यादा पन्नों वाले उस फैसले में विशेष न्यायाधीश की बातों और निष्कर्षों को ठीक से नहीं समझा।'
इसमें आगे कहा गया, 'इस तरह, अगर ऐसी याचिका को सुनवाई के लायक माना जाता है, तो प्रतिवादी को गंभीर नुकसान होगा।' न्यायमूर्ति मनोज जैन 17 और 18 अगस्त को सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई करेंगे जिसमें अधीनस्थ अदालत के 27 फरवरी के फैसले को चुनौती दी गई है।
केजरीवाल और सिसोदिया ने क्या रखा अपना पक्ष?
पिछली बार, न्यायमूर्ति जैन ने केजरीवाल, सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को याचिका का जवाब देने के लिए दो हफ्ते का आखिरी मौका दिया था। हाल की याचिकाओं में केजरीवाल और सिसोदिया ने कहा कि अधीनस्थ अदालत ने तीन महीने से ज्यादा समय तक मामले की विस्तार से सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने ऐसा कोई खास निष्कर्ष नहीं बताया है जो 'गलत' हो या जिसमें कोई अनियमितता दिखाई दे।
