कथित दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई के एक मामले में राउज ऐवन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। राउज ऐवन्यू कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई द्वारा लगाया गए आरोप में कोई दम नहीं मिला, कोई आपराधिक षड्यंत्र नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन अपना केस साबित करने में विफल रहा।
सीबीआई की चार्जशीट पर कई सवाल
इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर कई सवाल भी उठा। जज ने कहा क सीबीआई ने जो दस्तावेज दिए वो चार्जशीट से मेल नहीं खाते हैं। जज ने नाराजगी जताई कि अभी तक मुझे कन्फेशनल स्टेटमेंट की कॉपी तक नहीं दी गई। मैं सीबीआई के वकील से ईमानदारी की उम्मीद करता हूं। जज ने कहा- "मेरे मन में ये भी चिंता थी कि साउथ ग्रुप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। ये सही नहीं है। अगर सीबीआई यही चार्जशीट चेन्नई में फाइल करती तो क्या साउथ ग्रुप लिखती? किसने ये शब्द बनाया? इस पर सीबीआई ने कहा ये कई आरोपियों के लिए साझा शब्द था। इस पर जज ने कहा कि अमेरिका में एक केस इसलिए खारिज कर दिया गया कि क्योंकि डोमिनिक समूह के लिए शब्द का इस्तेमाल किया गया था। मेरा मानना है कि साउथ ग्रुप जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था।"
'केजरीवाल-सिसोदिया के खिलाफ सबूत नहीं'
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। यह आदेश विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने पारित किया। इसके साथ ही जस्टिस जितेंद्र सिंह ने सीबीआई की जांच पर कड़ी टिप्पणी भी की। अदालत ने CBI की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केजरीवाल और सिसोदिया को बिना ठोस सामग्री के मामले में आरोपित किया गया। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई द्वारा दायर की गई विस्तृत आरोपपत्र में कई कमियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से समर्थित नहीं हैं। सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में सीबीआई विफल रही है। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल के खिलाफ भी ठोस साक्ष्य का अभाव है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि अरविंद केजरीवाल को भी बिना किसी ठोस और विश्वसनीय सामग्री के मामले में घसीटा गया।
सभी 23 आरोपी आरोपमुक्त
अदालत ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है। न्यायाधीश ने किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार कर दिया। अदालत ने सीबीआई की जांच प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताते हुए एजेंसी को फटकार लगाई।
