देश

तिहाड़ से रिहा होने के बाद हनुमान मंदिर पहुंचे अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह भी रहे साथ

Delhi CM Arvind Kejriwal: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद शनिवार को कनॉट प्लेस स्थिति हनुमान मंदिर पहुंचे।

Image

पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ अरविंद केजरीवाल।

Photo : Twitter

Delhi CM Arvind Kejriwal: दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद शनिवार को कनॉट प्लेस स्थिति हनुमान मंदिर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ पत्नी सुनीता केजरीवाल और आप के सीनियर लीडर मनीष सिसोदिया और संजय सिंह भी मौजूद रहे। बता दें, अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले में जमानत दे दी थी। शाम को करीब 5 महीने बाद केजरीवाल तिहाड़ जेल से रिहा हो गए थे।

इससे पहले सीएम केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, आज दोपहर 12 बजे भगवान का शुक्रिया करने के लिए और उनका आशीर्वाद लेने के लिए कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर जाऊंगा। ज्ञात हो कि जब मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जेल से रिहा हुए थे तो उन्होंने भी हनुमान मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लिया था। इसी कड़ी में अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे।

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी सशर्त जमानत

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल शुक्रवार शाम को तिहाड़ जेल से बाहर आ गए। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आबकारी नीति मामले में उन्हें जमानत दी थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जवल भुइंया की पीठ ने उन्हें सर्शत जमानत दी थी, इसके बाद उन्हें रिहा किया गया।

देश के लिए जीवन समर्पित

केजरीवाल के स्वागत में तिहाड़ जेल के बाहर कार्यकर्ताओं व समर्थकों की भीड़ नजर आई थी। बारिश के बीच भी कार्यकर्ताओं ने बैंड बाजे व आतिशबाजी से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। सीएम अरविंद केजरीवाल ने जेल से बाहर आने के बाद भगवान का धन्यवाद किया था। उन्होंने कहा था, मैं उन लाखों-करोड़ों लोगों का भी शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने मेरे लिए मन्नतें मांगी, दुआएं की, आशीर्वाद भेजे और प्रार्थनाएं की। मेरे लिए कई लोग मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे गए। मैं उन सभी लोगों का दिल से धन्यवाद करता हूं। इतनी बारिश में भी आप सभी इतनी बड़ी संख्या में आए हैं, इसके लिए मैं आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। मेरा जीवन देश के लिए समर्पित है। मेरी जिंदगी का हर पल और मेरे खून का हर कतरा इस देश के लिए समर्पित है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article