Delhi Air Pollution Trucks: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा में घुले जहर और बढ़ते ट्रैफिक पॉल्यूशन को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और आंखें खोलने वाला खुलासा हुआ है। आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi), द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) और एयर पॉल्यूशन एक्शन ग्रुप (A-PAG) द्वारा किए गए एक संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययन (Study) से पता चला है कि दूसरे राज्यों से दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले भारी-भरकम ट्रक (Heavy Commercial Vehicles) यहां के वाहनों से होने वाले कुल प्रदूषण में करीब एक-चौथाई (25%) हिस्से के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
यह स्थिति तब है जब प्रशासन द्वारा इन ट्रकों को चौबीसों घंटे शहर में आने की अनुमति नहीं होती, बल्कि इन्हें केवल रात के तय और सीमित समय के दौरान ही दिल्ली में प्रवेश करने की इजाजत दी जाती है।
ट्रांजिट ट्रैफिक नहीं, 'क्षेत्रीय माल ढुलाई' बना बड़ा विलेन
सोमवार को जारी की गई इस विस्तृत रिपोर्ट में दिल्ली के प्रदूषण पैटर्न में आए एक बड़े बदलाव की ओर इशारा किया गया है। अध्ययन में विशेषज्ञों ने कहा है कि पहले यह माना जाता था कि दिल्ली से होकर दूसरे राज्यों में जाने वाले पुराने डीजल ट्रक (ट्रांजिट ट्रैफिक) प्रदूषण की मुख्य वजह हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है।
अब दिल्ली में ट्रकों से होने वाली प्रदूषण की समस्या मुख्य रूप से तेजी से बढ़ते 'क्षेत्रीय माल ढुलाई नेटवर्क' (Regional Freight Network) के कारण पैदा हो रही है। दिल्ली अब महज एक रास्ता नहीं, बल्कि इन वाणिज्यिक वाहनों का मुख्य केंद्र बन चुका है।
आंकड़ों का गणित: 92 फीसदी ट्रक दिल्ली के लिए ही आ रहे
अध्ययन के दौरान जब दिल्ली के एंट्री पॉइंट्स (प्रवेश द्वारों) पर डेटा जुटाया गया, तो बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:

दिल्ली में प्रवेश करने वाले 92% भारी ट्रक अपना गंतव्य दिल्ली बताते हैं, जबकि केवल 8% ट्रक खुद को बाईपास या ट्रांजिट ट्रैफिक के रूप में दर्ज कराते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में आने वाले इन ट्रकों में भी सबसे बड़ी तादाद उन वाहनों की है जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य राज्यों (जैसे हरियाणा और उत्तर प्रदेश) से आते हैं और दिल्ली में माल की डिलीवरी देकर वापस वहीं के लिए रवाना हो जाते हैं।
इस नए अध्ययन के सामने आने के बाद पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल बाईपास एक्सप्रेस-वे (ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरीफेरल) बनाने से दिल्ली को ट्रकों के धुएं से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिलने वाली। अब सरकार और नीति निर्माताओं को एनसीआर के क्षेत्रीय माल ढुलाई नेटवर्क को पूरी तरह से क्लीन एनर्जी (जैसे सीएनजी या इलेक्ट्रिक ट्रकों) पर शिफ्ट करने और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट के लिए वैज्ञानिक प्लानिंग करने की सख्त जरूरत है।
