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सीमाओं की निगेहबानी के लिए फैसला: 70 हजार करोड़ के हथियार खरीदेगी सेना, 60 यूएच मरीन चॉपर्स भी डील में

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 16, 2023, 06:04 PM IST

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 70 हजार करोड़ से अधिक के हथियार प्रणालियोंं के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सेना, वायुसेना, नौसेना और इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए हथियारों की खरीद की जाएगाी।

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भारतीय सेना (प्रतीकात्मक फोटो)

Photo : iStock

Defence Ministry: देश की सीमाओं की सुरक्षा और भारतीय सेना को मजबूती प्रदान करने के लिए गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने रक्षा बलों के लिए विभिन्न हथियार प्रणालियों की खरीद के लिए 70,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। अधिकारियों के मुताबिक, इस सौदे में भारतीय नौसेना के लिए एचएएल से 60 यूएच समुद्री हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए 32,000 करोड़ रुपये का मेगा ऑर्डर शामिल है।

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक रक्षा अधिकारियों ने बताया, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक गुरुवार को हुई, जिसमें विभिन्न हथियार प्रणाली खरीदने के लिए प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस फैसले के लिए रक्षा मंत्रालय सेना, नौसेना, वायु सेना और इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए हथियार खरीदेगी।

जानें क्या फैसले हुए बैठक में

रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में भारतीय सेना के लिए 307 ATAGS हॉवित्जर टैंक, नौसेना के लिए 60 मेड इन इंडिया यूटिलिटी मरीन हेलीकॉप्टर, शक्ति ईडब्ल्यू सिस्टम और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद की जाएगी, जिसकी कीमत 56 हजार करोड़ रुपये है। इसके अलावा भारतीय कोस्ट गॉर्ड के लिए के लिए 9 ALH ध्रुव हेलिकॉप्टर खरीदने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। वहीं, भारतीय वायु सेना के लिए लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ वेपन को मंजूरी मिली है, इसे SU-30 MKI विमान पर एकीकृत किया जाना है।

तट रक्षक बल को मिलेंगे चार हेलिकॉप्टर

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय तट रक्षक बल के लिए 3800 करोड़ रुपये से ज्यादा के 9 धुव्र मार्क चार हेलिकॉप्टरों का अधिग्रहण किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया, नौसेना के लिए खरीदे जा रहे यूएस मरीन हेलिकॉप्टर धुव्र हेलिकॉप्टर का ही एक वैरिएंट है, जो 2025-26 तक समुद्री सीमाओं की निगरानी व अन्य जरूरतों के लिए तैयार हो जाएगा। खास बात यह है कि रक्षा मंत्रालय ने इस रक्षा रखीद में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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