केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने वर्ष 2026 की पहली छमाही (1 जनवरी से 13 जुलाई) के दौरान देशभर में आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 48 आतंकवादी और नक्सली मारे गए, जबकि 336 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मान रही हैं।
नक्सल मोर्चे पर बड़ी कामयाबी
वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित इलाकों में सीआरपीएफ ने 40 नक्सलियों को मार गिराया, 71 नक्सलियों को गिरफ्तार किया और 336 नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए। इनमें 375 हथियार, 8,321 कारतूस, 321 आईईडी, 677 ग्रेनेड, 1,384 डेटोनेटर, 1,422 जिलेटिन स्टिक, 236.5 किलोग्राम विस्फोटक, 4.71 किलोग्राम मादक पदार्थ और 2 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी शामिल है।
दंतेवाड़ा, नारायणपुर और जगदलपुर में रिकॉर्ड सरेंडर
सीआरपीएफ के मुताबिक, दंतेवाड़ा में 63, नारायणपुर में 52 और जगदलपुर में DKSZC के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इसे नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अब झारखंड बना सबसे बड़ा ऑपरेशन जोन
सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में डी-माइनिंग अभियान अभी भी जारी है, लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य फोकस झारखंड, खासकर सीमावर्ती जिलों पर है। एजेंसियों का मानना है कि माओवादी सेंट्रल कमेटी का सदस्य मिसिर बेसरा (Misir Besra) अभी भी सक्रिय है और नक्सल विरोधी अभियान के अंतिम चरण में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर में भी आतंकियों पर सख्त कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ ने अभियान के दौरान 8 आतंकवादियों, जिनमें विदेशी आतंकवादी भी शामिल हैं, को मार गिराया। इसके अलावा 24 ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इन अभियानों में सुरक्षा बलों ने 16 हथियार, 492 कारतूस, 34 ग्रेनेड, एक रॉकेट और मादक पदार्थ भी बरामद किए।
आतंक और नक्सल नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई
सीआरपीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में बचे हुए उग्रवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान लगातार तेज किए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य आतंकवादी और नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना तथा शेष प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करना है।
