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10 साल बाद सत्ता में वापसी लेकिन CM चेहरे पर फंसी कांग्रेस केरल में फैसले में देरी क्यों?

सत्ता में वापसी के बावजूद कांग्रेस आलाकमान अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाया है। इसकी वजह सिर्फ एक नाम तय करना नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर कई स्तरों पर चल रही खींचतान और राजनीतिक संतुलन साधने की चुनौती है।

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CM चेहरे पर फंसी कांग्रेस केरल में फैसले में देरी क्यों? (फाइल फोटो)

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की शानदार जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खड़ा हो गया है। सत्ता में वापसी के बावजूद कांग्रेस आलाकमान अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाया है। इसकी वजह सिर्फ एक नाम तय करना नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर कई स्तरों पर चल रही खींचतान और राजनीतिक संतुलन साधने की चुनौती है।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल माने जा रहे हैं। कांग्रेस के 63 में से ज्यादातर विधायक उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। वेणुगोपाल को राहुल गांधी का बेहद करीबी माना जाता है और दिल्ली में उनकी मजबूत पकड़ है।

हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे फिलहाल सांसद हैं, विधायक नहीं। पार्टी पहले ही साफ कर चुकी थी कि सांसदों को विधानसभा चुनाव नहीं लड़ाया जाएगा। ऐसे में अगर वेणुगोपाल मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें लोकसभा सीट छोड़नी पड़ेगी और उपचुनाव कराना होगा।

दूसरी तरफ, विपक्ष के नेता रहे वी डी सतीशन भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने राज्य में कांग्रेस का आक्रामक चेहरा बनकर काम किया और कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ बनाई। वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला भी अपनी वरिष्ठता के आधार पर दावेदारी पेश कर रहे हैं।

संगठन की पसंद बनाम जनता की पसंद

कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन की पसंद और ज़मीनी कार्यकर्ताओं की भावना के बीच संतुलन बनाने की है। एक तरफ वेणुगोपाल को संगठन और विधायकों का समर्थन मिल रहा है, तो दूसरी तरफ सतीशन को कार्यकर्ताओं और जनता के बीच ज्यादा स्वीकार्यता वाला चेहरा माना जा रहा है।

इसी वजह से मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी पर सभी गुटों को साथ लेकर फैसला करने का भारी दबाव है, ताकि सरकार बनने के बाद किसी तरह की बगावत या असंतोष पैदा न हो।

उपचुनाव का डर भी बड़ी वजह

वेणुगोपाल अगर मुख्यमंत्री बनते हैं तो उन्हें अलप्पुझा लोकसभा सीट छोड़नी होगी। कांग्रेस को डर है कि उस सीट पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा फायदा उठा सकती है। गठबंधन के सहयोगी दल भी इसी जोखिम को लेकर चिंतित बताए जा रहे हैं। पार्टी 2004 की उस घटना को भी नहीं भूली है, जब मंत्री बनने के बाद के .मुरलीधरण उपचुनाव हार गए थे। ऐसे में कांग्रेस कोई जल्दबाजी वाला फैसला लेने से बचना चाहती है।

'कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है, इसलिए समय लग रहा'

केरल के पूर्व प्रभारी महासचिव तारिक अनवर ने टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत में कहा कि बीजेपी में मुख्यमंत्री का फैसला ऊपर से तय हो जाता है, लेकिन कांग्रेस में फैसले आम सहमति से होते हैं। उन्होंने कहा, 'बीजेपी में कौन मुख्यमंत्री बनेगा, ये फैसला पीएम की चिट से होता है, लेकिन कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यहां फैसले आम सहमति से होते हैं, इसलिए समय लग रहा है।' सूत्रों के मुताबिक अगले एक से दो दिनों में कांग्रेस आलाकमान केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर सकता है।

Ranjeeta Jha
रंजीता झाauthor

13 साल के राजनीतिक पत्रकारिता के अनुभव में मैंने राज्य की राजधानियों से लेकर देश की राजधानी तक सियासी हलचल को करीब से देखा है। प्लांट की गई बातें ख़बरें नहीं होती बल्कि बातों के पीछे छुपी सच्चाई असली ख़बर होती है। खबरें वही जो आपके सरोकार की हो वो आपतक लेकर आऊंगी।

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