देश

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सियासी चाल, केसीआर और केजरीवाल होंगे एक दाव में चित

  • Authored by: गौरव श्रीवास्तव
  • Updated Jun 27, 2023, 08:13 AM IST

Congress Lok Sabha Election Plan: ये जगजाहिर है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, नीतीश कुमार से लेकर शरद पवार, ममता बनर्जी और डी राजा सभी से अच्छे संबंध हैं। एक वक्त इन्हीं क्षत्रपों के साथ केसीआर ने गैर कांग्रेसी विपक्षी एकता की बिसात बिछाने की कोशिश थी। आज वही सारे नेता बगैर केसीआर राहुल गांधी के साथ हैं।

Image

राहुल गांधी- मल्लिकार्जुन खड़गे

Photo : PTI

Congress Lok Sabha Election Plan: बिहार की धरती पर विपक्षी एकता के बजे चुनावी बिगुल के बाद कांग्रेस ने अपना नया गेम प्लान तैयार कर लिया है। राहुल गांधी के चेहरे पर हुई सहमति के बाद कांग्रेस के निशाने पर न सिर्फ 2024 का आम चुनाव हैं, बल्कि राज्यों के चुनाव भी। लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस जोश हाई रखने के लिए राज्यों में भी विपक्षी एकता का दमखम दिखाएगी। इसकी शुरुआत तेलंगाना से हो गई है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव तक विपक्षी एकता का माहौल बनाए रखने के लिए इसमें शामिल दलों से व्यक्तिगत रिश्तों का त्याग कर एक साथ लड़ने का आह्वान करेगी।

सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय ने तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति को एक बड़ा झटका दे दिया। खम्मम से बीआरएस के बड़े नेता के साथ करीब 50 स्थानीय नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा कर दी। लेकिन ये बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है।

दक्षिण में किला मजबूत कर रही कांग्रेस

कर्नाटक विधानसभा में मिली बड़ी जीत के बाद कांग्रेस को दक्षिण भारत में अपने किले को और मजबूत करने में लग गई है। क्योंकि जिस तरह राजस्थान की लगभग हारी हुई सियासी लड़ाई में कांग्रेस खुद को दोबारा रेस में पा रही है, वैसी ही आहट कांग्रेस आलाकमान को तेलंगाना में सुनाई पड़ रही है। लेकिन अब लेफ्ट से लेकर तमाम दलों को केसीआर से अपने बॉन्ड को तोड़कर कांग्रेस का साथ देना ही होगा।

2 जुलाई को राहुल करेंगे चुनाव प्रचार का आगाज

राहुल गांधी 2 जुलाई को तेलंगाना के खम्मम जिले से तेलंगाना में चुनाव प्रचार का आगाज करेंगे। उस दिन सैकड़ों की संख्या में केसीआर के साथी कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। खम्मम वही जगह है जहां इसी साल जनवरी में केसीआर ने अपनी राष्ट्रीय राजनीति की महत्वाकांक्षा के चलते उन सभी क्षेत्रीय दलों के साथ हुंकार भरी थी जो आज कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ खड़े हैं। पहले लेफ्ट फिर कांग्रेस का गढ़ माना जाने वाला ये सीमावर्ती इलाका आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर है जहां से दोनों राज्यों की तेलगु आबादी पर असर पड़ता है। 2018 में हुए चुनाव में खम्मम की 10 विधानसभा सीट में से बीआरएस सिर्फ एक जीत पाई थी लेकिन बाद में कांग्रेस के 6 और टीडीपी के 2 विधायक इसमें शामिल हो गए। ये जगजाहिर है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, नीतीश कुमार से लेकर शरद पवार, ममता बनर्जी और डी राजा सभी से अच्छे संबंध हैं। एक वक्त इन्हीं क्षत्रपों के साथ केसीआर ने गैर कांग्रेसी विपक्षी एकता की बिसात बिछाने की कोशिश थी। आज वही सारे नेता बगैर केसीआर राहुल गांधी के साथ हैं।

एमपी-राजस्थान से केजरीवाल को दूर रखने का फुलप्रूफ प्लान तैयार

टाइम्स नाउ नवभारत ने ही सबसे पहले जानकारी दी कि अध्यादेश के मुद्दे को पटना की बैठक में बेवजह तूल देने की कोशिश देने वाली आम आदमी पार्टी को लेकर राहुल गांधी का क्या मत है। दिल्ली और पंजाब स्टेट यूनिट की राय के खिलाफ जाकर आप से समझौते के पक्ष में राहुल गांधी नहीं हैं। अब सूत्र बता रहे हैं कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते राजस्थान और मध्य प्रदेश में सीट में हिस्सेदारी मांगने वाले केजरीवाल को भी कांग्रेस बेनकाब करना चाहती है। रणनीतिकारों का मानना है कि जैसे कांग्रेस यूपी में अखिलेश यादव के साथ खड़े होकर बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ने को तैयार है, वैसा ही बाकी पार्टियों को भी अन्य राज्यों में करना होगा। ऐसे में जिन राज्यों में कांग्रेस मुख्य विपक्षी हो वहां बाकी दलों को भी साथ देना होगा।

परसेप्शन गेम में हारेंगे केजरीवाल!

राजस्थान हो या मध्य प्रदेश दोनों ही जगह केजरीवाल को सीट शेयरिंग में हिस्सेदारी की इच्छा छोड़कर कांग्रेस के समर्थन में खड़ा होना होगा। जबकि दिल्ली और पंजाब में दोनों को साथ लड़ना होगा। जिसके लिए अरविंद केजरीवाल शायद ही मानें। बीजेपी के बी टीम होने का आरोप झेलने वाली आम आदमी पार्टी की सियासी अपरिपक्वता शायद ही उसे कांग्रेस के साथ खड़े होने देगी और अगर ऐसा ही हुआ तो केजरीवाल परसेप्शन गेम में हार जाएंगे।

गौरव श्रीवास्तव
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

और पढ़ें
End of Article