‘अंदर बैठे लोग काटते हैं’, संसद में आवारा कुत्ता लाना रेणुका चौधरी को पड़ा भारी; विशेषाधिकार हनन नोटिस जारी
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 15, 2026, 06:21 PM IST
मामला 1 दिसंबर को शीतकालीन सत्र के दौरान का है। बताया जाता है कि चौधरी एक रेस्क्यू किए गए आवारा कुत्ते को अपनी कार में लेकर संसद परिसर पहुंचीं। कुछ सांसदों ने इस पर आपत्ति जताई और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। अब इसी मामले में रेणुका चौधरी को नोटिस जारी किया गया है।
कुत्ता लेकर संसद पहुंचीं रेणुका चौधरी (ANI)
राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस संसद परिसर में एक आवारा कुत्ते को कार से लाने और कथित तौर पर सांसदों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में जारी किया गया है। राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने उनसे नोटस पर 23 फरवरी तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
1 दिसंबर को शीतकालीन सत्र के दौरान का मामला
यह मामला 1 दिसंबर को शीतकालीन सत्र के दौरान का है। बताया जाता है कि चौधरी एक रेस्क्यू किए गए आवारा कुत्ते को अपनी कार में लेकर संसद परिसर पहुंचीं। कुछ सांसदों ने इस पर आपत्ति जताई और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। इसी दौरान कथित रूप से उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, “जो अंदर बैठे हैं, वही काटते हैं, कुत्ते नहीं।” इस बयान को सत्तापक्ष के कई सांसदों ने संसद सदस्यों की गरिमा के खिलाफ और अपमानजनक बताया।
नियम 188 के तहत विशेषाधिकार हनन का नोटिस
भाजपा सांसदों बृज लाल और इंदु बाला गोस्वामी ने नियम 188 के तहत विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। उनका आरोप है कि चौधरी का बयान संसद और उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों के सम्मान को ठेस पहुंचाता है। नोटिस में यह भी कहा गया कि संसद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है,जो गंभीर विषय है। राज्यसभा सभापति ने इस शिकायत को विशेषाधिकार समिति को भेज दिया, जिसने पिछले सप्ताह बैठक कर चौधरी से जवाब मांगने का निर्णय लिया।
"भौ भौ...मैं और क्या कहूँ।"
वहीं, इस मामले में रेणुका चौधरी के कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि वे संसदीय नियमों और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपना पक्ष रखेंगी। वे खुद को पशुप्रेमी बताती रही हैं और उन्होंने पहले कहा था कि रास्ते में मिले एक घायल आवारा कुत्ते को बचाया गया था,जिसे पशु चिकित्सक के पास ले जाया जाना था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि आवारा कुत्ते को बचाने के खिलाफ कोई कानून नहीं है। बाद में, जब कुछ पत्रकारों ने उनसे सत्ताधारी पार्टी के कुछ सांसदों द्वारा उनके खिलाफ विचाराधीन विशेषाधिकार प्रस्ताव पर टिप्पणी करने के लिए कहा, तो उन्होंने चुटीला जवाब दिया - "भौ भौ...मैं और क्या कहूँ।"
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान पहले से ही कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक चल रही थी। अब विशेषाधिकार समिति की जांच और चौधरी के जवाब के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
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