कांग्रेस कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बुधवार को महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर साझा रणनीति तय करेगी। इस बाबत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह बैठक अपने आवास पर दिन में तीन बजे बुलाई है।
सूत्रों ने बताया कि इस बैठक से पहले कांग्रेस के प्रमुख नेता इन विधेयकों को लेकर अलग से चर्चा करेंगे। सूत्रों ने यह भी कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी डिलिमिटेशन बिल 2026 का विरोध करने जा रही है, क्योंकि इसमें महिला आरक्षण कानून को नए परिसीमन से जोड़ा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस बिल के खिलाफ वोट करेगी। पार्टी का कहना है कि दोनों बिल आपस में जुड़े हुए हैं और मौजूदा स्वरूप में यह उन्हें स्वीकार नहीं है। कांग्रेस महिला आरक्षण कानून को 2027-28 की जनगणना से जोड़ने वाले संशोधन का भी विरोध करेगी और इसे अलग (delink) करने की मांग उठाएगी।
संसद में क्या होगा
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर बोल सकते हैं। राज्यसभा में सोनिया गांधी भी कांग्रेस का पक्ष रख सकती हैं। कांग्रेस की आपत्तियां हैं कि डिलिमिटेशन बिल 2026 के तहत 2026 में देशव्यापी परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध कर रहा है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार यह कदम “राजनीतिक लाभ” के लिए उठा रही है। बिल में परिसीमन को सीधे नवीनतम जनगणना से जोड़ना, डिलिमिटेशन कमीशन को केंद्रीय भूमिका देना, सीटों के बंटवारे, आरक्षित सीटों और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं पर असर डालना शामिल है।
गौरतलब है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रावधान है। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इन्हीं से संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।
कांग्रेस ने इन विधेयकों के संबंध में मंगलवार को कहा कि जब किसी विधेयक की मंशा शरारतपूर्ण और उसकी विषय वस्तु भ्रामक हो तो संसदीय लोकतंत्र को बहुत नुकसान होता है।
